राष्ट्रीय
05-Feb-2026
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नई दिल्ली(ईएमएस)। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई हालिया टेलीफोनिक वार्ता ने दोनों देशों के आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को एक नई तथा अभूतपूर्व ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। इस सार्थक संवाद के तत्काल बाद एक बड़े घटनाक्रम में अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर लगने वाले आयात शुल्क (टैरिफ) को 50 प्रतिशत के उच्च स्तर से घटाकर सीधे 18 प्रतिशत करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। वाइट हाउस ने गुरुवार को इस संबंध में एक विस्तृत आधिकारिक बयान जारी करते हुए इस व्यापार समझौते को दोनों लोकतांत्रिक देशों के लिए एक स्पष्ट जीत करार दिया। वाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने इस सौदे के रणनीतिक और आर्थिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए स्पष्ट किया कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच के प्रगाढ़ व्यक्तिगत संबंधों और आपसी विश्वास का परिणाम है। इस समझौते का सबसे महत्वपूर्ण और रणनीतिक पहलू ऊर्जा आयात से जुड़ा हुआ है। प्रेस सचिव लेविट के अनुसार, भारत ने रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद करने और इसके विकल्प के रूप में अमेरिका से ऊर्जा आयात को व्यापक रूप से बढ़ाने पर सहमति जताई है। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी प्रशासन ने संकेत दिया है कि भारत अपनी भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए वेनेजुएला से भी तेल आयात कर सकता है, जहाँ वर्तमान में अमेरिकी नियंत्रण और प्रभाव काफी अधिक है। इस बदलाव का सीधा अर्थ यह है कि भारत अब न केवल रूसी तेल से किनारा करेगा, बल्कि अमेरिकी ऊर्जा क्षेत्र का एक प्रमुख साझेदार बनेगा, जिसका सीधा लाभ अमेरिकी अर्थव्यवस्था और वहां के नागरिकों को होगा। आर्थिक मोर्चे पर वाइट हाउस ने एक और चौंकाने वाला दावा किया है, जिसके अनुसार प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका में 500 अरब डॉलर (लगभग 42 लाख करोड़ रुपये) के विशाल निवेश का संकल्प लिया है। यह निवेश मुख्य रूप से परिवहन, ऊर्जा और कृषि उत्पादों के क्षेत्रों में केंद्रित होगा। अमेरिकी आयोग ने इसे मेक इन अमेरिका और बाय अमेरिकन नीति की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना है। राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि भारत के प्रति मित्रता और सम्मान के भाव के रूप में यह पारस्परिक टैरिफ कम किया गया है। गौरतलब है कि पूर्व में रूस से तेल आयात के कारण अमेरिका ने भारत पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त पेनल्टी टैरिफ लगाया था, जिसे अब पूर्णतः वापस ले लिया गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए विश्वास व्यक्त किया है कि इससे मेक इन इंडिया के तहत बने भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजारों में एक बड़ी और प्रभावी बढ़त प्राप्त होगी। भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस समझौते की बारीकियों पर चर्चा करते हुए देशवासियों को आश्वस्त किया है कि इस बड़े व्यापारिक सौदे में भारत के संवेदनशील क्षेत्रों, विशेषकर कृषि और डेयरी, के हितों के साथ कोई समझौता नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय किसानों और छोटे व्यापारियों की सुरक्षा के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं ताकि उन पर विदेशी प्रतिस्पर्धा का कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। यह समझौता एक ऐसे समय में हुआ है जब भारत यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के साथ भी महत्वपूर्ण व्यापारिक वार्ताओं को अंतिम रूप दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका का यह बढ़ता सहयोग केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह क्वाड और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रक्षा एवं तकनीकी साझेदारी को भी एक नई दिशा और मजबूती प्रदान करेगा। वीरेंद्र/ईएमएस/05फरवरी2026