राष्ट्रीय
06-Feb-2026
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नई दिल्ली,(ईएमएस)। भारतीय रक्षा बजट में उल्लेखनीय वृद्धि के बाद अब देश की हवाई सीमाओं को अभेद्य बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। रक्षा मंत्रालय भारतीय वायुसेना के बेड़े में 114 नए राफेल लड़ाकू विमानों को शामिल करने के लिए लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये के विशाल प्रस्ताव पर विचार करने के लिए तैयार है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पड़ोसी देशों के साथ सीमावर्ती चुनौतियों और क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को देखते हुए वायुसेना की मारक क्षमता को और अधिक आधुनिक बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इस मेगा डील पर चर्चा की संभावना फरवरी के तीसरे सप्ताह में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा से ठीक पहले जताई जा रही है। राष्ट्रपति मैक्रों 18 फरवरी को एक अंतरराष्ट्रीय एआई शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए नई दिल्ली में होंगे। रक्षा सूत्रों के अनुसार, वायुसेना के इस प्रस्ताव को पिछले महीने रक्षा खरीद बोर्ड से प्रारंभिक हरी झंडी मिल चुकी है और अगले सप्ताह मंत्रालय की उच्च-स्तरीय बैठक में इसकी विस्तृत समीक्षा होने की उम्मीद है। मौजूदा सुरक्षा परिदृश्य में वायुसेना की ऑपरेशनल जरूरतों को पूरा करने के लिए इस परियोजना को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास लड़ाकू विमानों के लगभग 30 स्क्वाड्रन हैं, जो स्वीकृत संख्या 42 से काफी कम हैं। चीन और पाकिस्तान की बढ़ती सैन्य जुगलबंदी और बदलते रणनीतिक हालातों ने इस कमी को दूर करना अनिवार्य बना दिया है। प्रस्तावित 114 राफेल विमान 4.5 जेनरेशन-प्लस मल्टीरोल लड़ाकू विमानों की श्रेणी में आते हैं, जो वायुसेना की दीर्घकालिक क्षमताओं को नया आयाम देंगे। इस सौदे की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि मेक इन इंडिया पहल के तहत खरीदे जाने वाले इन विमानों में से लगभग 80 प्रतिशत का निर्माण भारत में ही किए जाने की योजना है। इस परियोजना के अंतर्गत वायुसेना को 88 सिंगल-सीटर और 26 ट्विन-सीटर विमान मिलेंगे, जिन्हें डसॉल्ट और भारतीय निजी क्षेत्र की कंपनियों के सहयोग से घरेलू स्तर पर तैयार किया जाएगा। यदि यह सौदा सफल रहता है, तो भारतीय वायुसेना के पास कुल 150 राफेल विमानों का बेड़ा होगा, जबकि नौसेना के पास पहले से ही 26 विमानों का समुद्री संस्करण होगा। इस बड़ी रक्षा खरीद की नींव हाल ही में पेश किए गए केंद्रीय बजट में रखी गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रक्षा क्षेत्र के लिए रिकॉर्ड 7.85 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 15 प्रतिशत अधिक है। यह कुल बजट का लगभग 14.68 प्रतिशत हिस्सा है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में रक्षा बजट में निरंतर वृद्धि देखी गई है। वर्ष 2021-22 में यह 4.84 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़ते हुए 7.85 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। यह पहली बार है जब रक्षा बजट में एक साथ 1.03 लाख करोड़ रुपये की भारी बढ़ोतरी की गई है। हालांकि, यह वृद्धि अभी भी भारत की जीडीपी का लगभग 2 प्रतिशत है, जो वैश्विक सैन्य मानकों और प्रतिस्पर्धी देशों के रक्षा खर्च के अनुपात में संतुलित मानी जा रही है। यह निवेश न केवल वायुसेना के आधुनिकीकरण को गति देगा, बल्कि भारत को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक मील का पत्थर साबित होगा। वीरेंद्र/ईएमएस/06फरवरी2026