नई दिल्ली(ईएमएस)। भारत के पड़ोसी क्षेत्र तिब्बत में शुक्रवार तड़के भूकंप के जोरदार झटकों ने दहशत पैदा कर दी। दुनिया की छत के नाम से मशहूर इस ऊंचे पठारी क्षेत्र में जब लोग गहरी नींद में थे, तब अचानक धरती कांपने लगी। रिक्टर पैमाने पर इस भूकंप की तीव्रता 4.5 मापी गई। भूकंप विज्ञान केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, यह भूकंप सुबह करीब 2:30 बजे आया, जिसका केंद्र जमीन से 25 किलोमीटर की गहराई पर था। इसे एक उथला भूकंप माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि उथले भूकंप अधिक खतरनाक होते हैं क्योंकि उनकी ऊर्जा सीधे सतह तक पहुँचती है, जिससे झटके बहुत तेज महसूस होते हैं। भूकंप के समय तिब्बत में हाड़ कँपाने वाली ठंड पड़ रही थी, जहाँ तापमान शून्य से 20 डिग्री नीचे तक गिर जाता है। अचानक आए झटकों से घरों की दीवारें कांपने लगीं और बर्तन गिरने लगे। जान बचाने के लिए लोग बिना गर्म कपड़ों के, बच्चों को गोद में लिए और कंबल ओढ़े सड़कों की ओर भागे। डर और सन्नाटे के बीच चीख-पुकार मच गई। हालांकि, राहत की बात यह है कि अभी तक किसी बड़े जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है। भूगर्भीय दृष्टि से तिब्बत का पठार बेहद संवेदनशील है। यहाँ भारतीय टेक्टॉनिक प्लेट लगातार यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है। इसी निरंतर टकराव के कारण हिमालय का निर्माण हुआ और आज भी यह क्षेत्र भूकंपों का गढ़ बना हुआ है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस इलाके में स्ट्राइक-स्लिप और नॉर्मल फॉल्ट्स बहुत सक्रिय हैं, जो भविष्य में बड़े भूकंपों का संकेत देते रहते हैं। यह क्षेत्र, जिसमें तिब्बत, नेपाल और उत्तर भारत के हिस्से शामिल हैं, एक ही फॉल्ट लाइन पर स्थित होने के कारण हमेशा जोखिम में रहता है। शुक्रवार को आए इस भूकंप ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता और भविष्य के खतरों के प्रति आगाह कर दिया है। वीरेंद्र/ईएमएस/06फरवरी2026