राष्ट्रीय
06-Feb-2026
...


नई दिल्ली,(ईएमएस)। इलेक्शन कमीशन (ईसी) ने सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) को लेकर विस्तृत हलफनामा दाखिल किया। आयोग ने कोर्ट को बताया कि राज्य में एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान लगातार राजनीतिक दखल देखने को मिला, जिससे चुनाव अधिकारियों का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ। हलफनामे में ईसी ने कहा कि देश के अन्य राज्यों में एसआईआर की प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से पूरी हुई, लेकिन पश्चिम बंगाल की स्थिति इससे बिल्कुल अलग रही। आयोग के अनुसार, राज्य में चुनाव अधिकारियों के खिलाफ हिंसा, धमकियों और दबाव की घटनाएं सामने आईं। ऐसे हालात बनाए गए कि बूथ लेवल ऑफिसर्स (बीएलओ) और अन्य चुनाव कर्मचारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में असमर्थ हो गए। ईसी ने आरोप लगाया कि बीएलओ द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों पर स्थानीय पुलिस ने अक्सर एफआईआर दर्ज करने से परहेज किया। कई मामलों में जिला चुनाव अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद ही प्राथमिकी दर्ज हो सकी। आयोग ने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने जानबूझकर चुनाव आयोग के निर्देशों का पालन नहीं किया, जिससे पूरी प्रक्रिया बाधित हुई। हलफनामे में 24 नवंबर 2025 की एक गंभीर घटना का भी जिक्र किया गया। चुनाव आयोग के मुताबिक, उस दिन कोलकाता स्थित चीफ इलेक्शन ऑफिसर के कार्यालय में प्रदर्शनकारियों ने जबरन घुसने की कोशिश की, पुलिस बैरिकेड तोड़े, दफ्तर में तोड़फोड़ की और अधिकारियों की आवाजाही रोक दी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। चुनाव आयोग ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा खतरे का आकलन किए जाने के बाद पश्चिम बंगाल के चीफ इलेक्शन ऑफिसर को वाय श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई थी। आयोग के अनुसार, वह देश के ऐसे एकमात्र चुनाव अधिकारी थे जिन्हें इस स्तर की सुरक्षा दी गई। चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि तमाम चुनौतियों और दबावों के बावजूद सभी बीएलओ ने अपने दायित्व निभाए। आयोग के अनुसार, 7.08 करोड़ से अधिक काउंटिंग फॉर्म जमा किए गए, जो कुल का 92.40 प्रतिशत है। इसके साथ ही इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अधिकारियों द्वारा लगभग 1.51 करोड़ नोटिस जारी किए गए। आयोग ने कोर्ट को बताया कि पात्रता तय करने और त्रुटियों के सुधार के लिए नोटिस चरण बेहद अहम है। यह प्रक्रिया बिना किसी डर, दबाव और राजनीतिक हस्तक्षेप के पूरी होनी चाहिए, ताकि मतदाता सूची की शुचिता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनी रहे। हिदायत/ईएमएस 06फरवरी26