क्षेत्रीय
06-Feb-2026
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- बेल्जियम में मुलाकात, फ्रांस की दुल्हन… हिंदू परंपरा में बंधा अनोखा रिश्ता सिंगरौली।(ई एम एस )गुरुवार की शाम सिंगरौली के पंचखोरा रोड पर रोशनी, ढोल-नगाड़ों और वैदिक मंत्रों की गूंज कुछ अलग ही कहानी बयां कर रही थी। यह सिर्फ एक शादी नहीं थी, बल्कि संस्कृतियों, देशों और दिलों के मिलन का ऐसा दृश्य था, जिसने हर देखने वाले को भावुक कर दिया। फ्रांस की रहने वाली शार्लोट ओलानियां और सिंगरौली के संदीप कुमार सिंह ने हिंदू रीति-रिवाजों के साथ विवाह कर यह साबित कर दिया कि प्यार की कोई सीमा, भाषा या सरहद नहीं होती। *विदेश में शुरू हुई दोस्ती, प्यार में बदली कहानी* संदीप कुमार सिंह मूलतः सिंगरौली के निवासी हैं और वर्तमान में बेल्जियम में एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं। काम के सिलसिले में उनकी मुलाकात फ्रांस के ओलां शहर की रहने वाली शार्लोट से हुई। बातचीत का सिलसिला धीरे-धीरे बढ़ा, संस्कृति, जीवनशैली और सोच को लेकर विचार साझा हुए और यही संवाद आगे चलकर गहरे प्रेम में बदल गया। लगभग दो वर्षों तक एक-दूसरे को समझने, समय देने और परिवारों से चर्चा करने के बाद दोनों ने विवाह का निर्णय लिया। *भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान बनी शादी की नींव* संदीप की इच्छा थी कि उनका विवाह भारत में, अपने शहर सिंगरौली में और हिंदू परंपराओं के अनुसार हो। शार्लोट ने न सिर्फ इस इच्छा को स्वीकार किया, बल्कि भारतीय संस्कृति को समझने के लिए पहले से ही रीति-रिवाजों, विवाह संस्कारों और परंपराओं के बारे में जानकारी हासिल की। यही कारण रहा कि विवाह के दौरान वह हर रस्म को पूरे आत्मविश्वास और सम्मान के साथ निभाती नजर आईं। *फ्रांस से 25 मेहमान, सिंगरौली बना अंतरराष्ट्रीय मेज़बान* इस विवाह को और भी खास बनाने के लिए शार्लोट के परिवार और रिश्तेदारों सहित करीब 25 विदेशी मेहमान फ्रांस से सिंगरौली पहुंचे। सिंगरौली जैसे छोटे शहर में विदेशी मेहमानों की मौजूदगी ने आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप दे दिया। पारंपरिक भारतीय स्वागत, तिलक और पुष्पमालाओं से उनका अभिनंदन किया गया। विदेशी मेहमान भारतीय भोजन, मसालों की खुशबू, लोक संगीत और शादियों में होने वाली चहल-पहल से बेहद प्रभावित दिखे। *वैदिक मंत्रों के बीच अग्नि के सात फेरे* रात में पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अग्नि को साक्षी मानकर संदीप और शार्लोट ने सात फेरे लिए। हर फेरे के साथ जीवन के सात वचनों को निभाने की कसमें ली गईं। विदेशी दुल्हन द्वारा मंत्रों का ध्यानपूर्वक पालन करना और हर रस्म को गंभीरता से निभाना लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। *हल्दी, मेहंदी और भारतीय रंगों में रंगी विदेशी दुल्हन* विवाह से पहले हल्दी की रस्म में माहौल पूरी तरह उत्सवमय हो गया। विदेशी मेहमानों ने भी ढोल की थाप पर नाचते-गाते इस रस्म का आनंद लिया। जब शार्लोट के हाथों में पारंपरिक भारतीय डिज़ाइन की मेहंदी रची गई, तो उनकी मुस्कान साफ बता रही थी कि वह इस संस्कृति से कितनी जुड़ चुकी हैं। पारंपरिक भारतीय परिधान में सजी शार्लोट और दूल्हे संदीप की जोड़ी ने हर किसी का दिल जीत लिया। *शहर में पहली बार बना ऐसा ऐतिहासिक पल* स्थानीय लोगों का कहना है कि सिंगरौली के इतिहास में यह पहला अवसर है, जब किसी विदेशी युवती ने पूरी श्रद्धा और परंपरा के साथ हिंदू रीति-रिवाज से विवाह किया। यही कारण है कि यह शादी सिर्फ एक पारिवारिक आयोजन न रहकर पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गई। *प्यार की जीत, संस्कृतियों का सुंदर संगम* विवाह संपन्न होने के बाद दोनों पक्षों के परिजनों, मित्रों और शुभचिंतकों ने नवदंपती को आशीर्वाद दिया। यह विवाह न केवल दो व्यक्तियों का, बल्कि दो देशों और दो संस्कृतियों का सुंदर संगम बन गया—जो यह संदेश देता है कि सच्चा प्रेम हर सीमा को पार कर सकता है। ई एम एस सें आर एन पाण्डेय सिंगरौली