देवरी/सागर (ईएमएस)। अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति, एवं अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक तथा वर्ग से पदाधिकारीगण एवं सदस्यगणो ने इस ज्ञापन के माध्यम से आपको अवगत कराना चाहते हैं कि, उच्च शिक्षण संस्थानों एवं विश्व विद्यालयीन शैक्षणिक सत्रों में हम अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग के छात्रों के साथ पक्षपातपूर्ण व्यवहार कर उनको अवसरों की समानता से वंचित रखा जा रहा है, जातिगत आधारित व्यवस्था के चलते संवैधानिक मर्यादाओं को तार-तार करके उच्च पदों पर आसीन होने से हमारे वर्ग एवं समुदाय को वंचित रखा जाता है।व्यवस्था के जटिल तंत्र के चलते भारतीय संसद द्वारा अन्य पिछडा वर्ग के लिये 52 प्रतिशत आबादी के अनुपात में मात्र 13 प्रतिशत आरक्षण का लाभ प्राप्त है, 14 प्रतिशत पिछडा वर्ग के आरक्षण पर उच्च न्यायपालिका द्वारा रोक लगा देने के कारण लाखों पिछडा वर्ग के छात्र।पद रिक्त होने के बावजूद भी नौकरियों से वंचित बने हुये हैं, इसके विपरीत मात्र आर्थिक रूप से पिछडे 15 प्रतिशत की आबादी वाले वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण का संसद द्वारा विधान पारित किया गया है, जिस पर कभी भी भारत की न्यायपालिका द्वारा प्रतिबंध नहीं लगाया गया है, जिससे पिछड़ा वर्ग सहित अनुसूचित जाति, एवं जनजाति सहित अन्य पिछडा वर्ग के सदस्यों में घोर निराशा व्याप्त हो गई है। यू.जी.सी.बिल एस.सी.एस.टी.एवं अन्य पिछडा वर्ग के लिये नई उम्मीद की किरण लेकर आया था, जिस पर सवर्ण समाज के दबाव में न्यायपालिका द्वारा अत्यधिक जल्दबाजी में स्थगन आदेश जारी कर दिया गया है। - यू.जी.सी.बिल का शीघ्र कियान्वयन कराया जावे अअन्य पिछडा वर्ग को नौकरियों में 27 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था कर लाभ दिलाया जावे। एस.सी.,एस.टी., एवं अन्य पिछडा वर्ग के सदस्यों को क्रमोन्नति एवं पदोन्नति दिलाये जाने हेतु राज्य सरकारों को आदेशित किया जावे। उच्च न्यायपालिका एवं कॉलेजों तथा विश्वद्यिालयों में समानता के सिद्धांतों के अनुरूप अन्य पिछडा वर्ग, एस.सी., एस.टी., अल्पसंख्यक वर्ग, एवं आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के सदस्यों को अपनी योग्यता के अनुपात में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित कराया जावे एवं उच्च जातियों द्वारा रचे गये षडयंत्रों से हमारे वर्गो की रक्षा की जावे।परम सम्माननीय महामहिम जी, हम दलित समाज से वंचित तथा अन्य पिछडा वर्ग, अल्पसंख्यकों की दशा को ध्यान में रखते हुये न्याय दिलाने की कृपा करे। इसी उददेश्य से हम हजारों हज़ार व्यक्ति स्थानीय माध्यम से आपके समक्ष यह ज्ञापन भेज रहे हैं। हम लोगों को आशा ही नहीं, पूर्ण विश्वास है आप हम ज्ञापनदाताओं की माँगों को मनमाने हेतु भारत सरकार को अवश्य ही निर्देशित कर न्याय दिलाने में सहयोग करेंगी। निखिल सोधिया/ईएमएस/06/02/2026