राष्ट्रीय
07-Feb-2026
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-विशेषज्ञ बोले- पब्लिक रिकॉर्डिंग को लेकर स्पष्ट नियम बनाए जाने जरूरी नई दिल्ली,(ईएमएस)। टेक्नोलॉजी ने जहां जीवन को आसान बनाया है, वहीं इसके कुछ रूप अब समाज के लिए चिंता का कारण बनते जा रहे हैं। स्मार्ट ग्लासेस, जिन्हें हाथों को फ्री रखते हुए फोटो-वीडियो लेने, ट्रांसलेशन और वॉयस असिस्टेंट जैसी सुविधाओं के लिए तैयार किया गया था, अब महिलाओं की निजता के लिए बड़ा खतरा बनते नजर आ रहे हैं। होटल, पार्क, सड़क, बस स्टॉप और सुपरमार्केट में बिना जानकारी के महिलाओं के वीडियो बनाए जाने और उन्हें सोशल मीडिया पर डालने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। कई देशों से सामने आ रही घटनाओं में यह सामने आया है कि कुछ लोग स्मार्ट ग्लासेस का इस्तेमाल चोरी-छिपे रिकॉर्डिंग के लिए कर रहे हैं। खासकर खुद को ‘पिक-अप आर्टिस्ट’ कहने वाले कुछ लोग बातचीत के बहाने महिलाओं को मानसिक रूप से प्रभावित करते हैं और पूरे संवाद को रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर कंटेंट के रूप में डाल देते हैं। बाद में इन वीडियो पर आपत्तिजनक टिप्पणियां और हैशटैग्स लगाए जाते हैं, जिससे महिलाओं को मानसिक तनाव और शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है। हाल ही में इंग्लैंड में एक महिला ने 47 साल के व्यक्ति के खिलाफ कोर्ट में मामला दर्ज कराया। महिला का आरोप था कि होटल में बिताए गए निजी पलों की रिकॉर्डिंग स्मार्ट ग्लासेस से की गई और बाद में वीडियो उसे भेजे गए। महिला की अनुमति के बिना रिकॉर्डिंग किए जाने के बावजूद आरोपी को जेल नहीं हुई, जिससे कानून की सीमाएं उजागर हुईं। अमेरिका में भी ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहां एक सुपरमार्केट में महिला से बातचीत करते हुए उसे गुपचुप तरीके से रिकॉर्ड किया गया और बाद में वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि पब्लिक जगहों पर प्राइवेसी को लेकर कानून अब भी पीछे है। मोबाइल फोन के कैमरे दिख जाते हैं, जिससे सामने वाला सतर्क हो सकता है, लेकिन स्मार्ट ग्लासेस में कैमरा छिपा होता है। ऐसे में यह समझना मुश्किल होता है कि कोई व्यक्ति रिकॉर्ड हो रहा है या नहीं। भारत में भी इस तरह की तकनीक को लेकर कोई स्पष्ट और सख्त कानून मौजूद नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में पब्लिक रिकॉर्डिंग को लेकर स्पष्ट नियम बनाए जाने जरूरी हैं। बिना अनुमति रिकॉर्डिंग पर सख्त कार्रवाई, टेक कंपनियों की जवाबदेही और आम लोगों में जागरूकता ही इस बढ़ते खतरे से निपटने का रास्ता है। खासतौर पर महिलाओं की सुरक्षा और निजता को ध्यान में रखते हुए कानून और तकनीक दोनों स्तर पर ठोस कदम उठाने की जरूरत महसूस की जा रही है। सिराज/ईएमएस 07 फरवरी 2026