सोनिया गांधी ने राउज एवेन्यू सेशंस कोर्ट में दाखिल किया अपना जवाब नई दिल्ली,(ईएमएस)। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की नागरिकता से जुड़ा मामला एक बार फिर चर्चा में है। सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर दायर याचिका पर उन्होंने राउज एवेन्यू सेशंस कोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया है। अपने जवाब में सोनिया गांधी ने उनके खिलाफ दायर याचिका का कड़ा विरोध करते हुए इसे पूरी तरह निराधार बताया और कोर्ट से याचिका खारिज करने की मांग की है। यह मामला उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें सोनिया गांधी पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए वोटर लिस्ट में नाम शामिल करवाने का आरोप है। इस याचिका में मजिस्ट्रेट कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें पिछले साल 11 सितंबर को विकास त्रिपाठी नामक व्यक्ति की शिकायत को खारिज कर दिया गया था। विकास ने अपनी शिकायत में सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी, जिसे मजिस्ट्रेट कोर्ट ने खारिज कर दिया था। अब इस आदेश को चुनौती देते हुए राउज एवेन्यू सेशंस कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। इस पर सोनिया गांधी की ओर से जवाब दाखिल किया गया है जिसमें कहा गया है कि याचिका में लगाए गए आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं है और यह सिर्फ बेबुनियाद आरोपों पर आधारित है। इसलिए कोर्ट को यह याचिका खारिज कर देनी चाहिए। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सोनिया गांधी ने 1983 में भारतीय नागरिकता हासिल कर ली थी, लेकिन उससे करीब तीन साल पहले ही उन्होंने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए भारत की वोटर लिस्ट में अपना नाम शामिल करवा लिया था। शिकायतकर्ता का दावा है कि सोनिया गांधी का नाम नई दिल्ली लोकसभा सीट की मतदाता सूची में सबसे पहले 1980 में जोड़ा गया था। शिकायत के मुताबिक इसके बाद 1982 में उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया और फिर 1983 में दोबारा वोटर लिस्ट में जोड़ा गया। विकास त्रिपाठी का आरोप है कि यह सब उस समय किया गया, जब सोनिया गांधी भारतीय नागरिक नहीं थीं और उन्होंने फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया था। हालांकि, मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पिछले साल 11 सितंबर को इस शिकायत को खारिज करते हुए कहा था कि आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हैं और न ही एफआईआर दर्ज करने का कोई औचित्य बनता है। इसी आदेश के खिलाफ अब सेशंस कोर्ट में चुनौती दी गई है। इस मामले में राउज एवेन्यू सेशंस कोर्ट में अगली सुनवाई 21 फरवरी को तय की गई है। अब अदालत यह तय करेगी कि मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप किया जाए या नहीं और क्या सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए। इस मामले पर सभी की नजरें कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं। सिराज/ईएमएस 07फरवरी26 -----------------------------------