राष्ट्रीय
07-Feb-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। बाहर से चमकदार दिखने वाले दांतों के भीतर कब धीरे-धीरे छेद बन जाता है, इसका पता नहीं चलता और जब तक जानकारी मिलती है, तब तक सड़न दांतों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा चुकी होती है। दांतों में दर्द या सूजन की समस्या पर तो लोग तुरंत ध्यान देते हैं, लेकिन दांतों की सड़न अक्सर साइलेंट किलर बनकर सामने आती है। दांतों में सड़न न सिर्फ असहनीय दर्द पैदा करती है बल्कि धीरे-धीरे अन्य दांतों को भी संक्रमित कर देती है। यही कारण है कि दांतों की नियमित देखभाल बेहद महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों के अनुसार दांतों की सड़न बहुत धीमी प्रक्रिया होती है और इसके शुरुआती लक्षण स्पष्ट नहीं होते। अक्सर दर्द होने पर ही पता चलता है कि दांत में सड़न बढ़ चुकी है। इसके कई कारण हैं अत्यधिक मीठा खाना, सही तरीके से ब्रश न करना, मुंह में लार का कम बनना, कैल्शियम और विटामिन डी की कमी, और रात में बिना ब्रश किए सो जाना। ये सभी कारण दांतों में बैक्टीरिया पनपने के लिए पर्याप्त होते हैं। आयुर्वेद में दांतों की सड़न रोकने और मसूड़ों को मजबूत रखने के कई घरेलू उपाय बताए गए हैं। पहला उपाय है लौंग के तेल का उपयोग। यह बैक्टीरिया कम करता है और दर्द में राहत देता है। रात में दांतों पर लौंग का तेल लगाकर कुछ देर छोड़ देने से सड़न की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। दूसरा उपाय है नीम की दातुन या नीम के पानी से कुल्ला करना। नीम प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल है और दांतों में बैक्टीरिया के संक्रमण को कम करता है। तीसरा उपाय है नारियल तेल से ऑयल पुलिंग, जिसमें तेल को 5 मिनट तक मुंह में घुमाया जाता है। यह दांतों के कोनों में फंसी गंदगी को साफ करता है और पीलेपन को भी कम करता है। चौथा उपाय है नमक और सरसों के तेल का मिश्रण। यह न सिर्फ दर्द में राहत देता है बल्कि बैक्टीरिया को खत्म करता है। हफ्ते में तीन बार लगाने से दांतों पर जमा परत और पीलापन भी कम होता है। इन घरेलू उपायों के साथ ही आहार में बदलाव भी आवश्यक है। रोजाना कैल्शियम और विटामिन डी से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन दांतों को मजबूत बनाता है, जबकि विटामिन सी मसूड़ों को स्वस्थ रखने में मदद करता है। दिन में किसी एक समय खट्टे फल का सेवन दांतों के स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक माना जाता है। सुदामा/ईएमएस 07 फरवरी 2026