अंतर्राष्ट्रीय
07-Feb-2026
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वॉशिंगटन(ईएमएस)। पाकिस्तान ने अमेरिका की जमकर चरण वंदना की। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए शांति के नोबेल पुरस्कार की मांग की। आज उसी अमेरिका ने पाकिस्तान को बड़ा और करारा झटका दिया है। अमेरिका और भारत के बीच हाल ही में हुए ट्रेड डील (व्यापार समझौते) के फ्रेमवर्क के साथ एक ऐसा नक्शा जारी किया गया है, जिसने इस्लामाबाद की नींद उड़ा दी है। यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रजेंटेटिव कार्यालय द्वारा जारी इस आधिकारिक नक्शे में पूरे जम्मू-कश्मीर, जिसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) भी शामिल है, को भारत के अभिन्न अंग के रूप में दिखाया गया है। यह कदम न केवल कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह इस बात पर भी मुहर लगाता है कि अमेरिका अब इस क्षेत्र में भारत के क्षेत्रीय संप्रभुता के दावे को पूर्ण समर्थन दे रहा है। दरअसल, यूएसटीआर ने भारत-अमेरिका के बीच नए अंतरिम व्यापार समझौते की जानकारी देते हुए एक पोस्ट साझा किया। इस पोस्ट का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी कृषि उत्पादों, जैसे कि ट्री नट्स, लाल ज्वार, और ताजे फलों के लिए भारत में नए बाजार खुलने की सफलता को रेखांकित करना था। लेकिन, इस पोस्ट के साथ जो नक्शा संलग्न किया गया, उसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। इस नक्शे में न तो कोई लाइन ऑफ कंट्रोल दिखाई गई और न ही किसी क्षेत्र को विवादित श्रेणी में रखा गया है। साफ तौर पर पूरा कश्मीर भारत के मानचित्र के भीतर प्रदर्शित किया गया है। भारत का हमेशा से यह अडिग रुख रहा है कि जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान और पीओके का पूरा इलाका भारत का हिस्सा है, जिस पर पाकिस्तान ने अवैध रूप से कब्जा जमा रखा है। अब अमेरिका जैसे वैश्विक प्रभाव वाले देश के आधिकारिक विभाग से ऐसा नक्शा आना इस बात का बड़ा संकेत है कि वॉशिंगटन अब पीओके के मसले पर तटस्थ रहने की अपनी पुरानी नीति को छोड़ चुका है। इसे प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर के लिए एक बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दशकों से जिस कश्मीर राग को अलापता रहा है, उसे उसके सबसे पुराने सहयोगियों में से एक ने सिरे से नकार दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह नक्शा महज एक ग्राफिकल त्रुटि नहीं, बल्कि एक सोचा-समझा कूटनीतिक संकेत है। भारत और अमेरिका के बीच गहराते रक्षा और व्यापारिक संबंधों के बीच, अमेरिका का यह कदम भारत के प्रति उसके बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। यह स्पष्ट संदेश है कि अमेरिका अब भारत के साथ न केवल टैरिफ कम करने और व्यापार बढ़ाने पर सहमत है, बल्कि वह भारत की क्षेत्रीय अखंडता के प्रति भी संवेदनशील है। पाकिस्तान, जो आर्थिक बदहाली से जूझ रहा है और अक्सर अमेरिका से सहायता की उम्मीद करता है, उसके लिए अपने सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार का यह रुख एक बड़ा रणनीतिक नुकसान है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब भारत ने वैश्विक मंचों पर बार-बार पीओके को वापस लेने के अपने संकल्प को दोहराया है। अमेरिका का यह समर्थन भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति को और मजबूत करने का काम करेगा। पाकिस्तान के लिए अब यह स्पष्ट है कि उसके घर में घुसकर बिरयानी खाने वाले मित्र देश भी अब भारत की शक्ति और उसके न्यायसंगत दावों का लोहा मान रहे हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/07फरवरी2026