07-Feb-2026
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वह दिन दूर नहीं जब हमारा देश मोहब्बत, सद्भाव और इंसाफ के रास्ते पर आगे बढ़ेगा नई दिल्ली,(ईएमएस)। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर उन्होंने कहा कि हिंदू राष्ट्र का सपना देखने वालों को पड़ोसी देश नेपाल के इतिहास से सबक लेना चाहिए। मदनी ने कहा कि नेपाल में भी एक समय हिंदू राष्ट्र की व्यवस्था लागू की गई थी, लेकिन वह ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी और आखिरकार वहां लोकतांत्रिक संविधान के तहत नई व्यवस्था अस्तित्व में आई। उनका कहना है कि यही उदाहरण बताता है कि किसी भी देश की तरक्की, स्थिरता और शांति लोकतंत्र और संविधान से ही संभव है, न कि किसी एक धर्म को राष्ट्र पर थोपकर। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मौलाना अरशद मदनी ने एक्स पर पोस्ट में लिखा कि नफरत के सौदागर और हिंदू राष्ट्र का सपना देखने वालों को नेपाल से सबक लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब-जब किसी देश में एक खास विचारधारा या धर्म को थोपने की कोशिश की गई, वहां अंततः वह व्यवस्था ढह गई और जनता ने लोकतांत्रिक मूल्यों को चुना। मदनी ने कहा कि नेपाल में हाल के समय में हिंदू राष्ट्र की स्थापना की गई थी, लेकिन अंततः वहां यह व्यवस्था समाप्त हो गई और एक लोकतांत्रिक संविधान के तहत नई राजनीतिक व्यवस्था बनी। उन्होंने कहा कि यह साफ संकेत है कि आज की वैश्विक परिस्थितियों में किसी भी देश की वास्तविक प्रगति तभी संभव है, जब वहां संविधान, लोकतंत्र और सभी नागरिकों के समान अधिकारों की रक्षा की जाए। मौलाना मदनी ने कहा कि भारत में भी कुछ सांप्रदायिक शक्तियां और संगठन देश को हिंदू राष्ट्र बनाने का सपना देख रहे हैं, लेकिन उनकी यह साजिश कभी सफल नहीं होगी। उन्होंने दो टूक कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद सेक्युलरिज्म और भारतीय संविधान की रक्षा के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष करती रहेगी। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान विविधता, सहअस्तित्व और संवैधानिक मूल्यों से है और इसे किसी भी सूरत में बदला नहीं जा सकता है। मदनी ने इस्लाम और मुसलमानों को लेकर कहा कि कुछ ताकतें इस्लाम और मुसलमानों दोनों को मिटाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि इस्लाम का चिराग कभी बुझ नहीं सकता। उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि जिन्होंने भी इस्लाम को मिटाने की कोशिश की वे खुद मिट गए। इस्लाम हमेशा कायम रहा है और रहेगा। मदनी ने मुसलमानों से निराश न होने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात से घबराने या मायूस होने की जरूरत नहीं है। इतिहास बताता है कि जो कौमें अपनी पहचान, संस्कृति और धर्म के साथ जीना चाहती हैं, उन्हें कुर्बानियां देनी पड़ती हैं। उन्होंने कहा कि मुसलमान एक जीवित कौम हैं और जीवित कौमें हालात से हार मानने के बजाय समझदारी, दूरदर्शिता और सही रणनीति से आगे बढ़ती हैं। अपने पोस्ट के आखिर में मदनी ने भरोसा जताया कि एक दिन ऐसा जरूर आएगा जब जुल्म का अंत होगा और अत्याचार करने वालों के गले में जंजीरें होंगी। उन्होंने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब हमारा देश हिंदुस्तान फिर से प्यार, मोहब्बत, सद्भाव और इंसाफ के रास्ते पर आगे बढ़ेगा। सिराज/ईएमएस 07फरवरी26 ----------------------------------