क्षेत्रीय
07-Feb-2026
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आज भक्तामर महामंडल विधान मुनिश्री के सानिध्य मे सीहोर ईएमएस)। जैन सिद्धांत हमें सिखाता है कि सभी के लिए खासकर एक सच्चे जैन अनुयायी के लिए व्यसनों का त्याग अनिवार्य है, जो उसे शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ बनाता है। जैन दर्शन में मांसाहार, मद्यपान, जुआ, चोरी, पर स्त्री सेवन, शिकार और वेश्यागमन सात व्यसन बताए गए हैं। ये सभी कर्मों को बढ़ाने वाले और आत्मा को दुःख देने वाले माने जाते हैं। इन सात व्यसनों को जैन धर्म में महापाप माना जाता है और इनसे दूर रहने की शिक्षा दी जाती है। इन व्यसनों का त्याग करके ही मोक्ष की प्राप्ति संभव है। व्यसनी व्यक्ति कभी भी संयम की साधना नहीं कर सकता। उक्त उदगार मुनिश्री विनंदसागर जी महाराज ने श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर मे धर्म सभा मे श्रध्दालुओ को संबोधित करते हुए प्रवचन के दौरान बताया कि जैन धर्म में इन सात व्यसनों का त्याग अनिवार्य माना गया है, क्योंकि ये व्यक्ति के आत्मिक उत्थान में बाधा उत्पन्न करते हैं। इन सप्त व्यसनों का त्याग करने वाला श्रावक ही मुनिराजों को आहार आदि दान देने के योग्य है, सप्त-व्यसनी नहीं। व्यसनी व्यक्ति देश धर्म समाज एवं परिवार पर बोझ होता है। वह सदैव अपने आप को एवं अपने परिवार को दुखी करता है, संकट में डालता है। व्यसनों से मुक्त रहना जैन धर्म के पालन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। मुनिश्री ने बताया कि जैन धर्म के सिद्धांतों का पालन करते हुए व्यक्ति अपने जीवन को शुद्ध, पवित्र और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बना सकता है। व्यसनों से दूर रहकर ही हम आत्मा की शुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। प्रातः मुनिश्री विनंदसागर सागर जी महाराज के सानिध्य मे श्रध्दालुओ ने तीर्थंकर भगवान की प्रतिमा के अभिषेक, शांति धारा नित्य नियम पूजन अर्चना धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कर धर्म लाभ अर्जित किया । तत्पश्चात धर्म सभा मे प्रवचन मुनिश्री के प्रवचन का श्रध्दालुओ ने श्रवण कर ज्ञानार्जन किया ।दोपहर मे स्वाध्याय धार्मिक शिक्षण कक्षा मे श्रध्दालुओ ने ज्ञानार्जन किया ।संध्या को गुरु भक्ति संगीतमय भजन कीर्तन कर श्रध्दालुओ ने भगवान का स्मरण किया ।आज प्रातः भक्तामर महामंडल विधान मुनिश्री के सानिध्य मे श्रावक श्राविकाए धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करेंगे ।श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर छावनी मे आज रविवार को प्रातः 7 बजे मुनिश्री विनंदसागर सागर जी महाराज के सानिध्य मे सकल जैन समाज के श्रावक श्राविकाए भक्तामर महामंडल विधान संगीतमय पूजा अर्चना धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कर धर्म लाभ अर्जित करेंगे।