07-Feb-2026
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नैनीताल,(ईएमएस)। उत्तराखंड के कोटद्वार निवासी दीपक कुमार, जिन्हें लोग अब ‘मोहम्मद दीपक’ के नाम से जानने लगे हैं, एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह है झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी द्वारा घोषित 2 लाख रुपये के पुरस्कार को लेने से उनका इनकार करना। दीपक ने कहा है कि यह राशि किसी दिव्यांग या जरूरतमंद व्यक्ति को दे दी जानी चाहिए। दरअसल, 26 जनवरी को कोटद्वार में एक कपड़े की दुकान के साइनबोर्ड पर लिखे ‘बाबा’ शब्द को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। कुछ लोगों ने मुस्लिम बुजुर्ग दुकानदार पर आपत्ति जताते हुए दबाव बनाया। इसी दौरान मौके पर मौजूद दीपक कुमार ने बीच-बचाव किया और बुजुर्ग का समर्थन करते हुए लोगों से सवाल किया। जब उनसे नाम पूछा गया तो उन्होंने खुद को ‘मोहम्मद दीपक’ बताया। यही जवाब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और दीपक देशभर में चर्चा का विषय बन गए। इस घटना के बाद झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने दीपक के साहस और सामाजिक सौहार्द के संदेश की सराहना करते हुए उन्हें 2 लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा की थी। हालांकि दीपक ने यह सम्मान स्वीकार करने से इनकार कर दिया। दीपक ने कहा कि उन्हें यह जानकारी सोशल मीडिया के जरिए मिली और उन्होंने तुरंत साफ कर दिया कि यह राशि किसी जरूरतमंद या दिव्यांग व्यक्ति की मदद में लगाई जाए। दीपक कुमार को इस घटना के बाद कई राजनीतिक नेताओं का समर्थन भी मिला। उत्तराखंड के पूर्व कांग्रेस मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी और हरक सिंह रावत ने उनके कदम की सराहना की। हालांकि दीपक ने साफ किया कि उनका किसी भी राजनीतिक दल से कोई लेना-देना नहीं है और वह राजनीति में नहीं पड़ना चाहते। उनका कहना है कि उन्होंने जो किया, वह इंसानियत के नाते किया, न कि किसी राजनीतिक मकसद से। खुद को साधारण इंसान बताया दीपक ने पहले भी कहा था कि वह खुद को किसी एक धर्म से नहीं जोड़ते। उनका कहना है, मैं न हिंदू हूं, न मुसलमान, न सिख और न ईसाई। मैं सिर्फ एक साधारण इंसान हूं। वहीं, संबंधित दुकानदार वकील अहमद ने बताया कि उनकी दुकान ‘बाबा स्कूल गारमेंट्स’ नाम से पिछले करीब 30 साल से चल रही है और इससे पहले कभी किसी ने नाम पर आपत्ति नहीं जताई थी। उन्होंने कहा कि ‘बाबा’ शब्द सभी धर्मों में प्रचलित है और इसे किसी एक धर्म से जोड़ना गलत है। दीपक कुमार का इनाम ठुकराने का फैसला अब सोशल मीडिया पर भी खूब सराहा जा रहा है और लोग इसे इंसानियत और सामाजिक सद्भाव का मजबूत संदेश बता रहे हैं। हिदायत/ईएमएस 07फरवरी26