नीरव की ट्रायल टालने की याचिका खारिज, मेहुल को जमा करनी होगी सुरक्षा राशि नई दिल्ली,(ईएमएस)। लंदन में बैठे भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी और उसके मामा मेहुल चोकसी, दोनों के लिए बुरी खबर है। अलग-अलग मामलों में ब्रिटेन की अदालतों ने साफ संकेत दे दिया कि अब देरी, बहाने और साजिश के आरोप काम नहीं आएंगे। लंदन हाई कोर्ट ने बैंक ऑफ इंडिया के बकाया ऋण मामले में नीरव मोदी की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उसने दृष्टिहीनता, अवसाद और जेल की परेशानियों का हवाला देकर ट्रायल टालने की मांग की थी। नीरव इस समय एचएमपी पेंटनविले जेल में बंद है और वीडियो लिंक के जरिए सुनवाई में पेश हुआ। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हाईकोर्ट जज ने साफ कहा कि नीरव को ट्रायल में ‘समान अवसर’ मिलेगा और उसे किसी तरह की ‘महत्वपूर्ण क्षति’ नहीं होगी। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि यह याचिका देरी करने के पैटर्न का हिस्सा लगती है। मतलब साफ बीमारी और हालात का सहारा लेकर समय खींचने की कोशिश अब कोर्ट को मंजूर नहीं। नीरव पर भारत में पंजाब नेशनल बैंक से जुड़े करीब 2 अरब डॉलर की धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और गवाहों से छेड़छाड़ जैसे गंभीर आरोप हैं। 2019 से वह ब्रिटेन की जेल में है और प्रत्यर्पण रोकने की उसकी कई अपीलें पहले ही खारिज हो चुकी हैं। वहीं नीरव मोदी के मामा मेहुल चोकसी को भी लंदन से करारा झटका लगा है। ब्रिटिश कोर्ट ने भारत सरकार और अन्य के खिलाफ उसके ‘अपहरण’ वाले मुकदमे में सिक्योरिटी ऑफ कॉस्ट का आदेश दे दिया यानी चोकसी को करीब 6 लाख पाउंड की रकम कोर्ट में जमा करनी होगी, ताकि अगर वह केस हार जाए तो विपक्ष के खर्च वसूल हो सकें। कोर्ट ने साफ कहा कि चोकसी के दावों में ‘उच्च संभावना’ नहीं दिखती। कोर्ट को यह भी आशंका है कि अगर चोकसी हारता है तो उससे खर्च वसूल पाना मुश्किल हो सकता है। इसलिए सुरक्षा राशि जरूरी है। चोकसी का दावा है कि 2021 में उसे एंटीगुआ से जबरन उठाकर डोमिनिका ले जाया गया। भारत सरकार ने इस आरोप को हर मंच पर नकारा है। सिराज/ईएमएस 08फरवरी26