क्षेत्रीय
08-Feb-2026
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- नवाचार तभी सार्थक है जब वह सामाजिक सरोकारों से जुड़ा हो: प्रो.आशीष शर्मा ग्वालियर ( ईएमएस ) । नवाचारी समाधान केवल तकनीक तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सोच, रणनीति और कार्यप्रणाली में परिवर्तन से ही वास्तविक नवाचार संभव होता है। शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उद्योग, समाज और नीति-निर्माण के बीच सेतु बनकर व्यवहारिक समाधान प्रस्तुत करने की भी होनी चाहिए।सतत विकास तभी संभव है जब संगठन नवाचार को अपनी कार्यसंस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनाएं। आज की प्रतिस्पर्धात्मक दुनिया में वही संस्थान टिके रह सकते हैं जो संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करते हुए पर्यावरण के प्रति संवेदनशील हों और समाज के व्यापक हित में निर्णय लें। नवाचार तभी सार्थक है जब वह सामाजिक सरोकारों से जुड़ा हो।शोध व अकादमिक विमर्श इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।यह बात रविवार को वक्ता के रूप में आरडीवीवी जबलपुर के प्रो.आशीष शर्मा ने जीवाजी विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ स्टडीज इन मैनेजमेंट द्वारा “समकालीन प्रबंधन के लिए सतत व्यावसायिक प्रथाएं: नवाचारी समाधानों की खोज” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि कही।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जेयू के कुलगुरू डॉ.राजकुमार आचार्य ने कहा कि सतत व्यावसायिक प्रथाएं आज केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की राष्ट्रीय संगोष्ठियां शिक्षकों, शोधार्थियों और उद्योग जगत के बीच सेतु का कार्य करती हैं। कुलसचिव डॉ. राजीव मिश्रा ने कहा कि जीवाजी विश्वविद्यालय निरंतर गुणवत्ता आधारित शोध, नवाचार और अकादमिक उत्कृष्टता को बढ़ावा दे रहा है। प्रो. राजेन्द्र खटीक ने कहा कि संगोष्ठी में प्रस्तुत शोध पत्रों से यह स्पष्ट होता है कि युवा शोधार्थी और शिक्षाविद सतत विकास लक्ष्यों को लेकर गंभीर और जागरूक हैं। प्रो.एस.के. सिंह ने कहा कि आज के प्रबंधन विद्यार्थियों को केवल सिद्धांत ही नहीं, बल्कि नवाचारी सोच, समस्या समाधान क्षमता और सामाजिक दायित्व की समझ भी विकसित करनी होगी।डॉ. स्वर्णा परमार ने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी वैश्विक परिवेश में प्रबंधन की सफलता सतत विकास, नैतिक मूल्यों और नवाचार के समन्वय पर निर्भर करती है। कार्यक्रम के दौरान सभी अतिथियों को शॉल श्रीफल व स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।यह संगोष्ठी पीएम-उषा योजना के अंतर्गत आयोजित की गई,जिसमें देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों एवं शोध संस्थानों से आए शिक्षाविदों,शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने सहभागिता की।समापन दिवस पर दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें 20 से अधिक शोध पत्रों का वाचन हुआ। वहीं दो दिवसीय संगोष्ठी में 50 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। विभिन्न सत्रों में शोधार्थियों एवं छात्र-छात्राओं ने अपने शोध अनुभव साझा किए और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त किया।इस अवसर पर प्रो. एसएन महापात्रा,प्रो.एसके सिंह,प्रो.महेंद्र गुप्ता, डॉ.सतेंद्र सिकरवार,डॉ.पीके जैन सहित शोधार्थी एवं छात्र छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन खुशी कुशवाह,यश टिलवानी ने किया वहीं डॉ.स्वर्णा परमार के आभार के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।