08-Feb-2026
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सावरकर को भारत रत्न पुरस्कार देने से इसकी प्रतिष्ठा और बढ़ जाएगी मुंबई,(ईएमएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में आरएसएस के शताब्दी वर्ष कार्यक्रम में कई मामलों पर अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने इस दौरान संघ का पद छोड़ने के सवाल का भी जवाब दिया। संघ प्रमुख भागवत ने कहा कि संघ ने उन्हें उनकी उम्र के बावजूद काम जारी रखने को कहा है। लेकिन अगर संघ उनसे पद छोड़ने को कहता हैं...........तब मैं तुरंत छोड़ दूंगा। उन्होंने कहा कि आरएसएस का काम प्रचार करना नहीं बल्कि समाज में संस्कार को तैयार करना है। जरूरत से ज्यादा प्रचार से दिखावा और फिर अहंकार आ जाता है। जबकि प्रचार बारिश की तरह होना चाहिए। सही समय पर और सीमित मात्रा में होना चाहिए। संघ अपने स्वयंसेवकों से आखिरी बूंद तक काम लेता है। संघ के इतिहास में अब तक ऐसी कोई स्थिति नहीं आई, जब किसी को जबरन रिटायर किया गया हो। दरअसल कहा जाता है कि संघ में आमतौर पर 75 साल की उम्र के बाद किसी पद पर नहीं रहने की परंपरा है। भागवत ने कहा कि संघ का नेतृत्व करने वाला शख्स हमेशा हिंदू ही होगा, फिर चाहे उसकी जाति कुछ भी क्यों ना होग। सरसंघचालक बनने के लिए क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र या ब्राह्मण होना कोई योग्यता नहीं है, जो हिंदू संगठन के लिए काम करता है। वहीं सरसंघचालक बनता है। आरएसएस का यह शीर्ष पद बेहतर से बेहतर योग्य उम्मीदवार को ही मिलता है। भागवत ने कहा कि संघ प्रमुख पद के लिए कोई चुनाव नहीं होता। क्षेत्रीय और संभागीय प्रमुख ही नियुक्ति करते हैं। आमतौर पर कहा जाता है कि 75 साल की उम्र के बाद बिना किसी पद के काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं 75 साल का हो गया हूं और आरएसएस को इसका पता है लेकिन संगठन ने मुझे पद पर रहकर काम जारी रखने को कहा है। जब भी आरएसएस पद छोड़ने को कहेगा, मैं पद छोड़ दूंगा लेकिन काम से रिटायरमेंट नहीं लूंगा। आरएसएस प्रमुख भागवत ने कहा कि संघ ने पहले से तय किया कि संपूर्ण समाज को संगठित करने के अलावा संघ को और कोई दूसरा काम नहीं करना है। बहुत से लोग कहते हैं कि नरेंद्र भाई प्रधानमंत्री हैं। संघ के प्रधानमंत्री हैं। उनकी एक राजनैतिक पार्टी है, वहां बीजेपी है, जो अलग है। उसमें बहुत स्वयंसेवक है, प्रभावी भी हैं। बता दें कि इसके पहले भागवत ने कहा था कि भारत में चार तरह के हिंदू हैं। पहले वे जो गर्व से कहते हैं कि हम हिंदू हैं। दूसरे वे जो कहते हैं कि हम हिंदू हैं तब क्या? इसमें गर्व करने वाली क्या बात है। वहीं तीसरे, वे जो कहते हैं कि धीरे से बोलो कि हम हिंदू हैं। और चौथे, वे जो भूल गए हैं कि हम हिंदू हैं। या फिर उन्हें भूलने को विवश किया गया है कि वे हिंदू हैं। बात दें कि संघ प्रमुख भागवत ने कहा कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को बनाते समय सभी को विश्वास में लिया जाना चाहिए और इसमें मतभेद नहीं पैदा होने चाहिए। भागवत ने आरएसएस के शताब्दी समारोह के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में यह बात कही। हाल में हुए भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर भागवत ने कहा कि समझौतों में लेन-देन होता है। उन्होंने कहा,यह दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद होना चाहिए... हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमें नुकसान न हो। हिंदुत्व विचारक वीर सावरकर को भारत रत्न सम्मान देने की मांग पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सावरकर को यह पुरस्कार देने से इसकी प्रतिष्ठा और बढ़ जाएगी। आशीष दुबे / 08 फरवरी 2026