नई दिल्ली,(ईएमएस)। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई से जुड़े कथित ‘पाकिस्तान कनेक्शन’ मामले को लेकर असम सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। असम कैबिनेट ने इस पूरे मामले को केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय को सौंपने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कैबिनेट बैठक के बाद प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है और कैबिनेट ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए केंद्र को भेजने की सिफारिश की है। मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि एसआईटी का गठन पाकिस्तानी नागरिक अली तौकीर शेख की कथित भारत विरोधी साजिश की जांच के लिए किया गया था। जांच में एक सांसद और एक ब्रिटिश नागरिक के साथ कथित संपर्क और मिलीभगत के बिंदु सामने आए हैं। इसी कारण एसआईटी की रिपोर्ट और इस मामले में दर्ज एफआईआर को गृह मंत्रालय को भेजा जाएगा, ताकि केंद्रीय एजेंसियां विस्तृत जांच कर सकें। यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब राज्य में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और इसे कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई पर राजनीतिक दबाव बढ़ाने की कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री सरमा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के पाकिस्तान से संबंध रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि गौरव गोगोई की पत्नी पहले एक ऐसे एनजीओ से जुड़ी थीं, जिनके कथित तौर पर पाकिस्तानी हितों से संबंध रहे हैं, और गोगोई स्वयं पहले पाकिस्तान जा चुके हैं। मुख्यमंत्री सरमा ने यह भी आरोप लगाया कि गौरव गोगोई एक प्रतिनिधिमंडल के साथ पाकिस्तान उच्चायोग गए थे, जहां उनकी मुलाकात तत्कालीन पाक उच्चायुक्त अब्दुल बासित से हुई थी। हालांकि, उन्होंने कहा कि एसआईटी ने गोगोई से पूछताछ नहीं की, क्योंकि वे मौजूदा सांसद हैं और उनके पद की मर्यादा को ध्यान में रखते हुए सीधे केंद्र को मामला सौंपा गया है। सरमा ने यह भी कहा कि यदि राज्य सरकार कठोर कदम उठाती, तो उस पर चुनाव से पहले राजनीतिक दुर्भावना का आरोप लगता। कैबिनेट के अनुसार यह कोई निजी मामला नहीं है, बल्कि तीन प्रमुख किरदारों—एक सांसद, उनकी ब्रिटिश पत्नी और पाकिस्तानी नागरिक अली तौकीर शेख—से जुड़ा विषय है। एसआईटी को शेख द्वारा भारत के आंतरिक मामलों में कथित दखल की जांच सौंपी गई थी और तय समय में रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप दी गई। वहीं दूसरी तरफ गौरव गोगोई ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें “हास्यास्पद और बेबुनियाद” बताया है। इस घटनाक्रम ने असम में सत्तारूढ़ भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव को और तेज कर दिया है। हिदायत/ईएमएस 08फरवरी26