(10 फरवरी यात्रा की 67वीं वर्षगांठ पर विशेष ) मार्टिन लूथर किंग जूनियर 15 जनवरी,1929 -- 04 अप्रैल, 1968 भारत में तीर्थ यात्रा -10 फरवरी से 10 मार्च, 1959 मेरा एक सपना है भाषण के लिए प्रसिद्ध, नागरिक अधिकारों का पक्षधर, बैपटिस्ट पादरी, अहिंसा में विश्वास रखने वाला तीस वर्ष का एक अमरीकी नागरिक अपनी पत्नी के साथ सत्य, अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी के देश में उन स्थानों, कार्यों को देखने के लिए पधारे, जो गांधीजी से संबंधित रहे। अपनी इस यात्रा को उस महापुरुष ने तीर्थ यात्रा का नाम दिया। केन्द्रीय गांधी स्मारक निधि द्वारा निमंत्रित यह व्यक्ति और कोई नहीं स्वयं रंगभेद, असमानता के विरुद्ध अमेरिका में अहिंसक आंदोलन चलाने वाले मार्टिन लूथर किंग जूनियर थे, जो अपनी पत्नी श्रीमती कोरेटा स्काॅट किंग के साथ भारत आए थे। 10 फरवरी से 10 मार्च, 1959 तक यह यात्रा हुई। दिल्ली से शुरू कर बिहार, बंगाल, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश होते हुए फिर दिल्ली। श्रीमती सुचेता कृपलानी, उपाध्यक्ष एवं जी रामचंद्रन, मंत्री, गांधी स्मारक निधि ने हवाई अड्डा पर मेहमानों का स्वागत किया। तीर्थ यात्रा की समाप्ति पर बहुत ही भावनात्मक ढंग से विदाई से पूर्व मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने दिल्ली में यह संदेश दिया, जो आज भी बेहद प्रासंगिक है। भारत की हमारी बहुत ही छोटी तीर्थयात्रा दुख की बात है कि खत्म हो गई है। मैं सभी को धन्यवाद देना चाहता हूँ कि आपने मेरे, मेरी पत्नी और डॉ. रेडिक के लिए अपने दरवाजे और दिल खोले। सरकार के अंदर और बाहर के नेताओं, संगठनों --- खासकर गांधी स्मारक निधि और क्वैकर सेंटर --- और कई घरों और परिवारों ने हमारे छोटे से प्रवास को सुखद और ज्ञानवर्धक बनाने के लिए अपनी पूरी कोशिशें की है। हमने इस यात्रा से बहुत कुछ सीखा है। हम इतने नासमझ नहीं हैं कि यह मान लें कि हम भारत को जानते हैं --- यह एक विशाल उपमहाद्वीप है, जिसमें इसके सभी लोग, समस्याएँ, विरोधाभास और उपलब्धियाँ हैं। हालाँकि, क्योंकि हमसे हमारे विचारों के बारे में पूछा गया है, इसलिए हम एक या दो सामान्य बातें कहना चाहेंगे: सबसे पहले, हमें लगता है कि गांधी की भावना आज कुछ लोगों के विश्वास से कहीं ज़्यादा मजबूत है। न केवल उनके साथियों और सहयोगियों का सीधा और अप्रत्यक्ष प्रभाव है, बल्कि महात्मा के पत्रों और अन्य लेखों, तस्वीरों, स्मारकों, गांधी स्मारक निधि के काम और संत विनोबा भावे के नेतृत्व वाले आंदोलन को संरक्षित करने के लिए संगठित प्रयास भी किए जा रहे हैं। ये कुछ उदाहरण हैं कि जिनसे गांधीजी भारत के लोगों के दिलों में हमेशा के लिए बसे रहेंगे। इसके अलावा, कई सरकारी अधिकारी जो गांधी का अक्षरशः पालन नहीं करते, वे भी उनकी भावना को घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं पर लागू करते है। दूसरा, मैं भारत के लोगों और सरकार से एक अपील करना चाहता हूँ। विश्व शांति का मुद्दा इतना महत्वपूर्ण है कि मुझे एक सुझाव देने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जो विनोबाजी के साथ हमारी बातचीत के दौरान मेरे मन में आया। दुनिया के शांतिप्रिय लोग अभी तक मेरे अपने देश, अमेरिका और सोवियत रूस को डर खत्म करने और खुद को निशस्त्र करने के लिए मनाने में सफल नहीं हुए हैं। दुर्भाग्य से, अभी तक अमेरिका और सोवियत संघ ने ऐसा करने के लिए विश्वास और नैतिक साहस नहीं दिखाया है। विनोबाजी ने कहा है कि भारत या कोई भी अन्य राष्ट्र जिसके पास विश्वास और नैतिक साहस है, वह कल ही, यहाँ तक कि एकतरफा भी, खुद को निशस्त्र कर सकता है। हो सकता है कि जिस तरह भारत को नेतृत्व करना पड़ा और दुनिया को दिखाना पड़ा कि राष्ट्रीय स्वतंत्रता अहिंसक तरीके से हासिल की जा सकती है, उसी तरह भारत को नेतृत्व करना पड़े और सार्वभौमिक निरस्त्रीकरण का आह्वान करना पड़े और अगर कोई अन्य राष्ट्र तुरंत उसके साथ शामिल नहीं होता है, तो भारत को एकतरफा रूप से खुद को निरस्त्रीकरण के लिए घोषित कर देना चाहिए। साहस का ऐसा कार्य महात्मा की भावना का एक बड़ा प्रदर्शन होगा और यह बाकी दुनिया को भी ऐसा करने के लिए सबसे बड़ा प्रोत्साहन होगा। इसके अलावा, जो भी देश ऐसा साहसी कदम उठाएगा, वह अपने आप ही दुनिया के लोगों का समर्थन हासिल कर लेगा, जिससे कोई भी हमलावर इंसानियत के गुस्से को मोल लेने का जोखिम उठाने से हतोत्साहित होगा। यह संदेश आज भी देश और दुनिया के लिए बहुत ही प्रासंगिक एवं जरुरी है। इस संदेश में आज की समस्याओं, कठिनाइयों, हिंसा, शस्त्रों की होड़ में डूबी दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण रास्ता, राहत नजर आती है। इस यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात अनेक प्रमुख लोगों से हुई। जिनमें सर्वोदय नेता संत बाबा विनोबा भावे, जयप्रकाश नारायण, राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद , उपराष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू, राजाजी राजगोपालचारी, दादा जे बी कृपलानी, डॉ जाकिर हुसैन, काका कालेलकर, यू एन ढेबर, मोरारजी देसाई, राजकुमारी अमृत कौर, डॉ सुशीला नैयर, प्यारे लाल नैयर, डॉ आर आर दिवाकर, जी रामचंद्रन, चीनी चिंतक प्रो तान युन शान, निर्मल कुमार बोस, डॉ सौन्द्रम रामचंद्रन, नंबूदरी पाद, शांति लाल शाह, पूर्व राजदूत जी एल मेहता आदि शामिल रहे। दिल्ली में प्रैस कांफ्रेंस, राजघाट पर प्रार्थना, श्रद्धा-सुमन, मुगल गार्डन को देखना, क्वेकर केन्द्र एवं विभिन्न विशिष्ट लोगों से मुलाकात, स्वागत-सत्कार में भोज, चर्चा, बातचीत के साथ-साथ सप्रू हाउस में जनसभा, सर्वोदय कार्यकर्ताओं से बातचीत तथा रामजस कॉलेज में छात्रों के मध्य कार्यक्रम हुए। पटना में राज्यपाल, मुख्यमंत्री से चम्पारण सत्याग्रह पर चर्चा। विश्वविद्यालय में छात्रों के मध्य कार्यक्रम। बौद्ध गया में बुद्ध विहार, बोधि वृक्ष का दर्शन, मुलाकात, विनोबा भावे द्वारा स्थापित समन्वय आश्रम में कार्यक्रम हुए। जयप्रकाश नारायण जी के सोखोदेवरा आश्रम में सादगी एवं ग्राम जीवन का अनुभव, विचार-विमर्श। गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के विश्व भारती का सांस्कृतिक विरासत का दर्शन। शांति निकेतन में चीनी चिंतक से मुलाकात। कलकत्ता के प्रवास में मजदूर नेताओं से बातचीत का मौका मिला। ट्रेन के साथ-साथ ट्रक की भी यात्रा। विरोधाभास देखने को मिला। गांधी के साथ रहे निर्मल कुमार बोस से मुलाकात। कोरेटा स्काॅट किंग का आल इंडिया रेडियो स्टूडियो कार्यक्रम। दक्षिण भारत की यात्रा ने और रुचि बढ़ाई। मद्रास में राजभवन में निवास। जनसभा एवं छात्रों की सभा। महाबलीपुरम, मदुरै, मीनाक्षी मंदिरों की विशालता देखी। मद्रास एवं गांधी ग्राम की यात्रा में खादी, ग्रामोद्योग, ग्राम दान से संपत्ति का बंटवारा, समतामूलक स्वावलंबी समाज की झलक दिखाई दी। ग्रामीण परिवेश, शांति सेना, अहिंसा का अनुशासन देखने का अवसर मिला। गांधी विचार पर चल रहे शैक्षणिक एवं आर्थिक प्रयोग देख कर प्रभावित हुए। राजाजी से हुई मुलाकात ने यात्रा को विशेष बना दिया। समुदायिक कार्यकर्मों का अवलोकन। हरिजन बस्ती में कार्यक्रम। केले के पत्ते पर जमीन पर बैठकर खाना खाया। पहली बार नारियल पानी एवं नारियल गिरी का स्वाद चखा। गांधी संग्रहालय मदुरै में कार्यक्रम। गैर कांग्रेसी सरकार की राजधानी त्रिवेन्द्रम में मुख्यमंत्री ईएमएस नम्बुदरीपाद एवं राज्यपाल से मुलाकात। केरल में ऊंच शिक्षा दर। शिक्षित बेरोजगार एवं भोजन सामग्री के अभाव की बात सामने आई। त्रिवेन्द्रम में समुद्र स्नान एवं तैरने का आनंद लिया। कोरेटा स्काॅट किंग ने यहां कार्यक्रम में गाना प्रस्तुत किया। कोरेटा स्काॅट किंग गीत, संगीत में रुचि रखती थी। त्रिवेन्द्रम में बहुत बड़ी जन सभा का आयोजन हुआ। भारत का एक छोर कन्याकुमारी प्रवास में सागर दर्शन का एकांत आनंद, गांधी मंडपम् , लोगों से मुलाकात। समुद्र के किनारे पत्थर की शिला पर ध्यान में बैठे। वहां पर पश्चिम में सूर्यास्त एवं पूर्व में चांद का अद्भुत नजारा देखा। बंगलौर, मैसूर में उद्योगों, फैक्ट्रियों, औद्योगिक विकास की झलक देखी। पशु मेला देखा। राज्यपाल, मुख्यमंत्री सहित विभिन्न व्यक्तियों से मुलाकात, बातचीत। समयाभाव के कारण वृंदावन गार्डन का कार्यक्रम रद्द करना पड़ा। विश्व सांस्कृतिक संस्थान में जनसभा हुई। बम्बई में मणि भवन का अनुभव शानदार रहा। गांधी स्मारक निधि के अध्यक्ष डॉ आर आर दिवाकर यहां साथ रहे। मणि भवन में गांधीजी के जीवन से जुड़ी सामग्री को देखने, गांधी विचार को समझने का अच्छा मौका मिला। गांधीजी के पत्र, चर्खा, बिस्तर, उनके उपयोग में लाई वस्तुओं को देखा। मणि भवन में भारत की आवाज नामक गांधी जी पर आधारित फिल्म देखी। ग्रीन होटल में नागरिकों की सभा में विस्तार से बताया। पूर्व राजदूत जी एल मेहता के यहां प्रमुख लोगों की सभा का आयोजन। अफ्रीकी छात्रों से मुलाकात, बातचीत। राज्यपाल, मुख्यमंत्री से मुलाकात। प्रैस कांफ्रेंस का आयोजन। साबरमती नदी के किनारे स्थित साबरमती आश्रम, अहमदाबाद जहां से बापू ने नमक सत्याग्रह के लिए दांडी यात्रा शुरू की थी।इसका अपना ही अनुभव रहा। आश्रम प्रार्थना में शामिल हुए। विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों से मुलाकात। संत बाबा विनोबा भावे से मिलने तथा भूदान यात्रा में शामिल होने के लिए अजमेर, किशनगढ़, राजस्थान पहुंचे। जेपी साथ रहे। भूदान यात्रा में शामिल होना, साथ-साथ चलना, विनोबा भावे से बातचीत विशेष महत्वपूर्ण रहा।एक गांव में विनोबा भावे से बातचीत हुई। जो यादगार बन गई। भूदान यात्रा में बाबा के साथ चले। मार्टिन लूथर किंग स्वास्थ्य के कारण शांति सेना के सम्मेलन में भाग नहीं ले सके। इसका दुःख रहा। आगरा में ताज महल देखने गए। भारत में हिमालय, गांधी एवं ताज महल को बड़ा आश्चर्य मानते थे। गांधी रचनात्मक कार्यों, स्थलों का दर्शन, गांधी जी से जुड़े व्यक्तियों से मुलाकात, विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों से बातचीत, नागरिकों सभाओं में व्यक्त विचारों ने यात्रा को सार्थक, उपयोगी बनाया। उस समय संत बाबा विनोबा भावे की भूदान यात्रा राजस्थान में चल रही थी। सर्वोदय नेता जयप्रकाश नारायण जी के साथ मार्टिन लूथर किंग विनोबा भावे जी से मिलने गए और भूदान यात्रा में शामिल हुए, पैदल भी चले। बाबा से उनकी मुलाकात एक यादगार अनुभव बना। आज हिंसा, द्वैष, नफरत, अलगाव, झूठ, अविश्वास का बोलबाला बढ़ रहा है। शोषण-दोहन, लूट-खसोट, दबाव के दम पर अस्त्रों-शस्त्रों का धंधा जारी है। अमर्यादित पूंजी, पैसे के खेल में खुला अनैतिक, भ्रष्ट मनमानीपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है। विकास के नाम पर सुविधाओं से भरी दुनिया रचने का नाटक जारी है। सेवा, साधना, सादगी, सहजता-सरलता गायब है। श्रम को हीन दृष्टि से देखा जा रहा है। विज्ञापन, प्रचार-प्रसार के नाम पर थोथी मगर चमक-दमक वाली दुनिया दिखाई जा रही है। मूल्य, मर्यादा खंडित हो रहे है। तथाकथित विकास के नाम पर दुनिया में गजब खेल चल रहा है। वह मानवता ही नहीं प्रकृति, सृष्टि के लिए भी बेहद घातक एवं विभत्स है। दुनिया को सर्वनाश की ओर ले जाया जा रहा है। इसे क्या कहा जाए कि गांधी से प्रेरणा लेने वाले, अहिंसक आंदोलन में विश्वास रखने वाले, अहिंसा, करुणा, समता में विश्वास रखने वाले को भी अमेरिका में सहन नहीं किया गया। भारत में महात्मा गांधी को तीन गोलियां और मार्टिन लूथर किंग जूनियर को अमेरिका में बम विस्फोट मिला। महात्मा गांधी के देश भारत से विशेष आशा है कि वह दुनिया को अहिंसा, सत्य, सत्याग्रह के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दे सकता है। गांधीजी ने अपने जीवन काल में इसे चरितार्थ करके दिखाया है। गांधी विचार दुनिया के लिए धरोहर है। हमें हिम्मत जुटाकर इसे आगे बढ़ाने में लगना होगा। (यह लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है) .../ 9 फरवरी /2026