फ्लोरिडा,(ईएमएस)। अमेरिका का सनशाइन स्टेट कहा जाने वाला फ्लोरिडा इन दिनों एक अजीबोगरीब और डरावनी प्राकृतिक घटना का केंद्र बना हुआ है। पूर्वी अमेरिका में चल रही भीषण शीतलहर ने यहाँ के पारिस्थितिकी तंत्र को हिलाकर रख दिया है। कड़ाके की इस सर्दी का सबसे भयावह असर यहाँ पाए जाने वाले हरे इगुआना पर पड़ा है। ठंड के कारण ये जीव सुन्न होकर पेड़ों से किसी पके हुए फल की तरह जमीन पर गिर रहे हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन्यजीव अधिकारियों ने अब तक लगभग 5,195 जमे हुए इगुआना को इकट्ठा कर उन्हें इच्छा मृत्यु दे दी है। क्यों लकवाग्रस्त हो रहे हैं इगुआना? जीव विज्ञान के अनुसार, इगुआना कोल्ड-ब्लडेड (शीत-रक्त) जीव होते हैं। इंसानों के विपरीत, इनका शरीर बाहरी वातावरण के अनुसार अपनी गर्मी पैदा नहीं कर सकता। जब तापमान 50 डिग्री फारेनहाइट (लगभग 10 डिग्री सेल्सियस) से नीचे जाता है, तो इनके शरीर की चयापचय प्रक्रिया सुस्त होने लगती है। मियामी और आसपास के इलाकों में पारा 35 डिग्री फारेनहाइट तक गिरने से ये जीव कोल्ड-स्टन्ड अवस्था में पहुँच गए हैं। इस स्थिति में इनका शरीर पूरी तरह लकवाग्रस्त हो जाता है और ये पेड़ों की डालियों पर अपनी पकड़ खो देते हैं। जमीन पर गिरने के बाद ये मृत प्रतीत होते हैं, हालांकि इनका दिल धड़क रहा होता है और सांसें अत्यंत धीमी गति से चल रही होती हैं। प्रशासन का कड़ा फैसला और पारिस्थितिक कारण हजारों की संख्या में इन जीवों को मारने का फैसला क्रूर लग सकता है, लेकिन इसके पीछे गहरे पर्यावरणीय कारण हैं। फ्लोरिडा फिश एंड वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन कमीशन के अनुसार, हरे इगुआना यहाँ की मूल प्रजाति नहीं हैं। इन्हें 1960 के दशक में पेट्स (पालतू जानवर) के तौर पर लाया गया था, लेकिन अब ये एक आक्रामक प्रजाति बन चुके हैं। ये जीव स्थानीय वनस्पति को नष्ट करने के साथ-साथ सड़कों, फुटपाथों और नहरों के किनारे गहरी सुरंगें बनाकर बुनियादी ढांचे को कमजोर कर रहे हैं। साथ ही, इनसे साल्मोनेला जैसे संक्रमण फैलने का खतरा भी बना रहता है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि इस भीषण ठंड ने प्रशासन को एक प्राकृतिक अवसर दिया है ताकि इन आक्रामक जीवों की आबादी को नियंत्रित कर स्थानीय पर्यावरण को सुरक्षित किया जा सके। पर्यटकों और निवासियों को चेतावनी स्थानीय प्रशासन ने लोगों को सलाह दी है कि वे जमीन पर गिरे हुए इगुआना को न छुएं। हालांकि वे जमे हुए दिखते हैं, लेकिन तापमान बढ़ते ही वे अचानक सक्रिय होकर हमला कर सकते हैं। फिलहाल, वन्यजीव टीमें प्रभावित इलाकों में गश्त कर रही हैं ताकि सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और मरे हुए जीवों को हटाया जा सके। वीरेंद्र/ईएमएस 09 फरवरी 2026