ज़रा हटके
09-Feb-2026
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जिनेवा (ईएमएस)। प्रजनन आयु की हर 10 में से 1 महिला एंडोमेट्रियोसिस से जूझ रही है। इस स्थिति में गर्भाशय के अंदर बनने वाला टिश्यू शरीर के अन्य अंगों जैसे अंडाशय, आंत, डायफ्राम या फेफड़ों में बढ़ने लगता है। यह लंबे समय तक असहनीय दर्द देता है और समय रहते इलाज न मिले तो बांझपन का कारण भी बन सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार अधिकतर महिलाएं तेज पीरियड दर्द को ही इसका संकेत समझती हैं, जबकि शरीर कई अनोखे लक्षणों के जरिए भी चेतावनी देता है। जैसे पीरियड के दौरान कंधे में अचानक तेज दर्द जो डायफ्राम या फेफड़ों के पास टिश्यू जमा होने का संकेत हो सकता है। कई महिलाओं में कब्ज, दस्त, गैस या पेट फूलना जैसे लक्षण दिखते हैं, जिन्हें अक्सर खराब पाचन समझ लिया जाता है। बार-बार पेशाब आने, पेशाब के दौरान जलन या दर्द बढ़ जाने पर इसे अक्सर यूटीआई मान लिया जाता है, जबकि यह एंडोमेट्रियोसिस का संकेत हो सकता है। कुछ महिलाओं को कूल्हे से घुटने तक फैलने वाला दर्द महसूस होता है, जो नसों पर दबाव के कारण होता है। लगातार थकान, शरीर में भारीपन और माइग्रेन जैसे लक्षण भी इस बीमारी से जुड़े माने जाते हैं। हार्मोनल बदलाव और शरीर में बनने वाले स्कार टिश्यू की वजह से सिरदर्द बढ़ सकता है। एंडोमेट्रियोसिस का अभी कोई स्थायी इलाज उपलब्ध नहीं है, लेकिन जल्दी पहचान से लक्षणों को काफी हद तक नियंत्रण में किया जा सकता है। हार्मोनल थेरेपी और दर्द निवारक दवाएं राहत देती हैं, जबकि गंभीर मामलों में सर्जरी के जरिए अतिरिक्त टिश्यू हटाया जाता है। जीवनशैली में बदलाव जैसे संतुलित डाइट, योग और नियमित व्यायाम सूजन कम करने और दर्द नियंत्रित करने में मदद करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पीरियड दर्द आपकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रहा है या ऊपर बताए गए लक्षण हर महीने परेशान कर रहे हैं, तो इसे सहना या छुपाना खतरनाक हो सकता है। ऐसे में तुरंत किसी स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना बेहद आवश्यक है। दुनियाभर में लगभग 19 करोड़ महिलाएं एक ऐसी बीमारी से पीड़ित हैं, जिसे अक्सर मामूली पीरियड दर्द मानकर अनदेखा कर दिया जाता है। सुदामा/ईएमएस 09 फरवरी 2026