- AG आफिस में सरकारी वकीलों की नियुक्ति में सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देने निर्देश जबलपुर (ईएमएस)। ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एम.एम. सुंद्रेश तथा जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने मंगलवार को हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए मध्य प्रदेश शासन को निर्देश दिए हैं कि महाधिवक्ता कार्यालय में शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्तियों के दौरान ओबीसी, एससी, एसटी तथा महिलाओं का समुचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की सिंगल बेंच और डिवीजन बेंच द्वारा पूर्व में दिए गए आदेशों को त्रुटिपूर्ण करार दिया है। इससे पहले हाईकोर्ट ने एसोसिएशन की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि सरकारी वकील का पद लोक सेवक की श्रेणी में नहीं आता है, लिहाजा इसमें आरक्षण या विशेष प्रतिनिधित्व की आवश्यकता नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को अस्वीकार करते हुए विविधता और प्रतिनिधित्व को संवैधानिक मूल्यों के आधार पर अनिवार्य माना है। ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने वर्ष 2022 में हाईकोर्ट के फैसले के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी। इस मामलें में एसोसिएशन की ओर से जबलपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, वरुण ठाकुर एवं विनायक शाह ने पैरवी की।