- कहा-“नागरिकों की स्वतंत्रता ऐसे नहीं छीनी जा सकती”: आवेदक महिला को दी अग्रिम जमानत जबलपुर (ईएमएस)। म.प्र. उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जीएस अहलूवालिया की एकलपीठ ने छतरपुर पुलिस द्वारा एक आपराधिक मामले के काउंटर केस डायरी पेश न किए जाने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि विवेचना अधिकारी के इस रवैये से स्पष्ट होता है कि वह नहीं चाह रहे कि आरोपी की जमानत अर्जी पर सुनवाई हो सके। न्यायालय ने आगे कहा कि पुलिस का यह रवैया स्वीकार्य नहीं होगा। पुलिस को देश के किसी भी नागरिक के जीवन और स्वतंत्रता को छीनने की इजाजत नहीं दी जा सकती। इस मत के साथ न्यायालय ने दूसरे मामले की केस डायरी के आधार पर एक महिला को अग्रिम जमानत का लाभ प्रदान कर दिया। छतरपुर जिले के भगवां थानांतर्गत ग्राम महीखेड़ा में रहने वाली दिव्याराजा उर्फ देवकुमारी सिंह की ओर से दायर उक्त अग्रिम जमानत अर्जी में उल्लेख किया गया था कि 19 जनवरी 2025 को कचरा फेंकने के विवाद पर गांव में दो पक्षों के बीच विवाद हुआ। दिव्याराजा के पक्ष ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई जबकि उसके अगले दिन दूसरे पक्ष ने दिव्याराजा व उसके परिजनों के खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज करा दी। अगले दिन दर्ज हुई एफआईआर में अग्रिम जमानत का लाभ पाने यह अर्जी दाखिल की गई थी। इस मामले में उच्च न्यायालय ने छतरपुर पुलिस से दूसरे दिन दर्ज हुई मामले की केस डायरी तलब की थी। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से अधिवक्ता अमन सोनी हाजिर हुए। मामले में शासन की ओर से कहा गया कि दूसरे दिन दर्ज हुए केस डायरी उपलब्ध नहीं है। इस बयान पर एकलपीठ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि विवेचना अधिकारी के रवैये से साफ है कि वो नहीं चाहते कि इस जमानत अर्जी पर सुनवाई हो सके। यही वजह है कि उन्होंने दूसरे मामले की केस डायरी नहीं भेजी। इसके बाद न्यायालय ने आरोपी महिला को अग्रिम जमानत का लाभ दे दिया। अजय पाठक / मोनिका / 11 फरवरी 2026