-बांग्लादेश में आम चुनाव आज ढाका,(ईएमएस)। बांग्लादेश में गुरुवार 12 फरवरी को आम चुनाव होने वाले हैं। 13 साल बैन रहने के बाद जमात-ए-इस्लामी पहली बार चुनाव लड़ रही है। कट्टरपंथी पार्टी माने जाने वाली जमात ने पिछला चुनाव 2008 में लड़ा था। जमात ने इस बार एक हिंदू कैंडिडेट उतारा है, वहीं किसी महिला को टिकट नहीं दिया। इस बारे में जमात के चुनाव प्रभारी एहसान-उल-जुबैर कहते हैं कि मर्दों के लिए चुनाव लड़ना जितना आसान होता है, उतना महिलाओं के लिए नहीं होता। सुरक्षा बड़ा मुद्दा है। इसलिए सभी महिलाएं चुनाव नहीं लड़ना चाहतीं। उन्होंने भारत से रिश्तों, संविधान में बदलाव के लिए हो रहे जनमत संग्रह और हिंदुओं के साथ हो रही हिंसा पर भी जवाब दिए। हम सम्मान और मर्यादा के आधार पर दूसरे देशों से रिश्ते रखना चाहते हैं। बीते 16 साल में जो लोग सत्ता में थे, उन्होंने बांग्लादेश की विदेश नीति को पूरी तरह एक देश पर फोकस किया था। ये बांग्लादेश के सम्मान और मर्यादा के मुताबिक नहीं था। हम चाहते हैं कि पड़ोसियों के साथ दुबारा रिश्ते बनाए जाएं। भारत के साथ हमारे कई मुद्दे हैं, जैसे तीस्ता बैराज, बॉर्डर पर हत्याएं और 54 नदियों के पानी का बंटवारा। भारत ऊपरी देश होने की वजह से पानी रोकता है। इसकारण बांग्लादेश को बहुत नुकसान होता है। यहां सूखे जैसे हालात बन रहे है। इन समस्याओं को आपसी समझ के जरिए सुलझाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम अपने लोगों को बहुसंख्यक-अल्पसंख्यक में अलग नहीं बांटते। हिंदू, ईसाई, बौद्ध, सब इस देश के नागरिक हैं। हम सब मिलकर देश बनाना चाहते हैं। 5 अगस्त 2024 के बाद सभी धर्मों के पूजा स्थलों की सुरक्षा की। हमने उन्हें भरोसा दिया कि किसी तरह की नाइंसाफी नहीं होगी। जो यहां जन्मे हैं, वे देश के नागरिक हैं। शेख हसीना के राज में कई घटनाएं हुईं। इन्हें हमारे और विपक्ष के खिलाफ इस्तेमाल किया गया। बाद में साबित हुआ कि वे सच नहीं थीं। पिछले 17-18 महीनों में जो घटनाएं हुईं, उनकी वजह धार्मिक नहीं, बल्कि राजनीतिक है। हमारी पार्टी ने किसी घटना का समर्थन नहीं किया। बांग्लादेश के कुल वोटर में आधी महिलाएं हैं। बांग्लादेश के समाज में महिलाओं के लिए कुछ तयशुदा नियम, परंपराएं और मान्यताएं हैं। हर देश का सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक इतिहास और परंपराएं होती हैं। उसी के हिसाब से उस देश की राजनीति और सिस्टम चलता है। जमात-ए-इस्लामी में करीब 40 प्रतिशत महिलाएं हैं। जमीनी कैडर से लेकर संगठन में ऊपर तक हर जगह महिलाओं की मौजूदगी है। हर जगह उन्हें सम्मान मिलता है। मर्यादा में रहकर संगठन चलाने का मौका मिलता है। कोई महिला राजनीति करे या चुनाव लड़े या न लड़े, यह उसका निजी और पारिवारिक फैसला होता है। आशीष दुबे / 11 फरवरी 2026