- कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद शुरू हुआ इलाज गुना (ईएमएस)।जिला अस्पताल में हाल ही में नई क्रिटिकल केयर बिल्डिंग में शिफ्टिंग और गोल्डन ऑवर में त्वरित उपचार के दावों के बीच एक गरीब परिवार की 4 साल की मासूम को गंभीर हालत में सरकारी अस्पताल से लौटाए जाने का मामला सामने आया है। बच्ची ने खेलते-खेलते 5 रुपए का सिक्का निगल लिया, जो उसके गले में फंस गया था। सांस लेने और निगलने में दिक्कत होने पर परिजन उसे तत्काल जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन वहां से आवश्यक मशीनरी और विशेषज्ञ सुविधा नहीं होने की बात कहकर निजी अस्पताल भेज दिया गया। जानकारी के अनुसार ऊंधल महावत जोगी, मूल निवासी अयोध्या (उप्र), पिछले चार-पांच महीनों से गुना में तंबू डालकर चटाई, चूड़ी-कंगन बेचकर परिवार चला रहे हैं। घटना के समय बच्ची की मां घर के काम में लगी थी और पिता फेरी लगाने गए थे। लौटने पर पता चला कि नेहा ने सिक्का निगल लिया है। जिला अस्पताल में जांच के दौरान गले में सिक्का फंसा दिखाई दिया, लेकिन परिजनों का कहना है कि डॉक्टरों ने मशीन उपलब्ध नहीं होने की बात कहकर उन्हें निजी अस्पताल जाने की सलाह दी। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के पास निजी अस्पताल में मांगे गए 10 हजार रुपए तत्काल जमा करने की व्यवस्था नहीं थी। वे अस्पताल के बाहर बैठकर मदद की आस में इंतजार करते रहे। इस दौरान रेडक्रॉस के एक सदस्य ने पूरे मामले की जानकारी कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल को दी। कलेक्टर ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए निजी अस्पताल में उपचार सुनिश्चित कराया। राम हाईटेक अस्पताल के प्रबंधन ने बच्ची को भर्ती कर लिया है। डॉक्टरों के अनुसार उसे निगरानी में रखा गया है और खाली पेट कर बेहोशी की अवस्था में सिक्का निकालने की प्रक्रिया की जाएगी। अस्पताल प्रबंधन ने आर्थिक सहयोग की भी बात कही है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब जिला अस्पताल की नई बिल्डिंग में गंभीर मरीजों को गोल्डन ऑवर में तुरंत बेड और उपचार देने का दावा किया जा रहा है। सवाल यह है कि जब नई यूनिट में आधुनिक उपकरण उपलब्ध होने की बात कही जा रही है, तो एक गरीब की बच्ची को मशीन के अभाव में निजी अस्पताल क्यों भेजा गया। फिलहाल कलेक्टर के हस्तक्षेप से बच्ची का इलाज शुरू हो गया है, लेकिन व्यवस्था को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। -सीताराम नाटानी