राज्य
11-Feb-2026
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:: अमीर बनने के शॉर्टकट ने पहुँचाया सलाखों के पीछे, कॉल रिकॉर्ड से खुलेगा ड्रग नेटवर्क :: इंदौर (ईएमएस)। इंदौर को नशामुक्त करने के लिए पुलिस कमिश्नर द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत क्राइम ब्रांच ने बड़ी सफलता अर्जित की है। प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थान एसजीएसआईटीएस कॉलेज के ठीक सामने सार्वजनिक शौचालय की आड़ में ब्राउन शुगर बेच रहे दो तस्करों को पुलिस ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 10.46 ग्राम उच्च गुणवत्ता वाली ब्राउन शुगर बरामद हुई है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 1.10 लाख रुपए आंकी गई है। पुलिस की इस मुस्तैदी ने कैंपस के आसपास सक्रिय ड्रग नेटवर्क की कमर तोड़ दी है। क्राइम ब्रांच को गोपनीय सूचना मिली थी कि कॉलेज कैंपस के आसपास बाहरी युवक मादक पदार्थों की सप्लाई के लिए सक्रिय हैं। इसी आसूचना पर टीम ने योजनाबद्ध तरीके से कॉलेज के सामने घेराबंदी की। पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में तैनात थे ताकि तस्करों को भनक न लगे। इसी दौरान सार्वजनिक शौचालय के पास खड़े दो युवक पुलिस को देख घबराने लगे और भागने का प्रयास किया, जिन्हें टीम ने मुस्तैदी से दबोच लिया। पूछताछ में आरोपियों ने अपना नाम सौरभ सोनकर और गौरव मालवीय (दोनों निवासी पालदा) बताया। तलाशी लेने पर उनके पास से पुड़ियों में रखी ब्राउन शुगर बरामद हुई। पकड़े गए आरोपियों का प्रोफाइल शिक्षा और अपराध के विरोधाभास को दर्शाता है। आरोपी सौरभ हम्माली का काम करता है और 11वीं पास है, जबकि उसका साथी गौरव स्नातक (ग्रेजुएट) है और गाड़ी चलता है। एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया के अनुसार, आरोपियों ने प्रारंभिक पूछताछ में स्वीकार किया कि वे कम समय में अमीर बनने के लालच में इस काले कारोबार में उतरे थे। वे बाहरी क्षेत्रों से सस्ते दामों पर नशे की खेप लाकर कॉलेज रोड और शैक्षणिक क्षेत्रों में छात्रों को निशाना बनाते थे। क्राइम ब्रांच अब इस कड़ी की जांच कर रही है कि इन युवाओं के तार किन बड़े तस्करों से जुड़े हैं। क्राइम ब्रांच ने ब्राउन शुगर के साथ तस्करी में प्रयुक्त दो मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। कुल जब्त मशरूका की कीमत 1.60 लाख रुपए बताई जा रही है। थाना अपराध शाखा ने आरोपियों के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। पुलिस अब आरोपियों के मोबाइल कॉल रिकॉर्ड्स खंगाल रही है ताकि उनके ग्राहकों और सप्लायर्स का नेटवर्क पूरी तरह ध्वस्त किया जा सके। पुलिस का दावा है कि शहर में नशा तस्करी के खिलाफ यह अभियान आगे भी सख्ती से जारी रहेगा। :: विशेष टिप्पणी :: :: शिक्षा के द्वार पर नशे की दस्तक - एक गंभीर चेतावनी :: इंदौर की पहचान शिक्षा के हब के रूप में है, लेकिन एसजीएसआईटीएस जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के मुहाने पर ड्रग्स की सरेराह डिलीवरी होना शहर के लिए एक खतरनाक संकेत है। क्राइम ब्रांच की यह कार्रवाई केवल दो तस्करों की गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि उस कड़वे सच का खुलासा है कि नशे के सौदागरों की नजर अब हमारे भविष्य यानी विद्यार्थियों पर है। हैरानी की बात यह है कि पकड़े गए आरोपियों में एक स्नातक युवा है। जब शिक्षित युवा ही अमीर बनने के शॉर्टकट के लिए अपराध की इस दलदल को चुनता है, तो यह सामाजिक और नैतिक पतन की ओर इशारा करता है। कॉलेज कैंपस के पास सार्वजनिक शौचालय जैसी जगहों को ड्रग पॉइंट बनाना सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की गश्त के लिए एक बड़ी चुनौती है। पुलिस की मुस्तैदी काबिले तारीफ है, लेकिन असली समाधान जागरूकता में है: - अभिभावकों को सतर्क होना होगा : अपने बच्चों के व्यवहार और उनकी संगति पर पैनी नजर रखें। - संस्थानों की जिम्मेदारी : कॉलेजों को अपने परिसर के बाहर होने वाली संदिग्ध गतिविधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनानी होगी। नशा केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि एक पूरे परिवार और देश के भविष्य को खत्म कर देता है। पुलिस के नशामुक्त इंदौर अभियान की सफलता तभी संभव है, जब समाज का हर नागरिक सूचना तंत्र बनकर ऐसे सौदागरों के खिलाफ खड़ा हो। प्रकाश / 11 जनवरी 2026