राष्ट्रीय
12-Feb-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। भारतीय महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। बदलती जीवनशैली, अनियमित दिनचर्या, नींद की कमी और लगातार बना रहने वाला तनाव इस कैंसर के प्रमुख कारण बनकर उभरे हैं। हालिया शोध और आईसीएमआर की स्टडी के अनुसार, पहले जहां स्तन कैंसर मुख्य रूप से 50 वर्ष की उम्र के बाद देखा जाता था, वहीं अब 35 से 50 वर्ष की महिलाएं इसकी सबसे बड़ी शिकार बन रही हैं, जो स्थिति को और अधिक गंभीर बनाता है। नेशनल सेंटर फॉर डिजीज इंफॉर्मेटिक्स एंड रिसर्च के अनुसार भारत में ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में हर साल लगभग 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। देर से शादी, स्तनपान न कराना और शारीरिक गतिविधियों की कमी इसके बड़े योगदानकर्ता हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि आधुनिक जीवनशैली में बदलावों ने महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन को बढ़ावा दिया है, जिससे जोखिम और भी अधिक बढ़ गया है। नींद की कमी भी एक महत्वपूर्ण वजह के रूप में उभर कर सामने आई है। वैज्ञानिकों के अनुसार कम नींद लेने से शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन का स्तर कम हो जाता है, जिससे एस्ट्रोजन का संतुलन बिगड़ता है। यही हार्मोनल बदलाव कैंसर कोशिकाओं को पनपने का मौका देता है। गहरी नींद के दौरान शरीर सेल्स और डीएनए की मरम्मत करता है, लेकिन जब नींद पूरी नहीं होती तो यह प्रक्रिया बाधित हो जाती है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर पड़ने लगती है। मोटापा भी ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी शरीर में सूजन और इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ाती है। मेनोपॉज के बाद शरीर में फैट एस्ट्रोजन का प्रमुख स्रोत बन जाता है और एस्ट्रोजन का उच्च स्तर स्तन कोशिकाओं में कैंसर बनने की संभावना को बढ़ाता है। इसीलिए संतुलित वजन बनाए रखना बेहद आवश्यक है। डॉक्टरों का कहना है कि केवल मैमोग्राफी पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि महिलाओं को अपनी दिनचर्या में सुधार करने की जरूरत है। रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम करना, पर्याप्त नींद लेना, योग और ध्यान के माध्यम से तनाव कम करना बेहद जरूरी है। सुदामा/ईएमएस 12 फरवरी 2026