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12-Feb-2026
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न्यूयार्क (ईएमएस)। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की 1267 प्रतिबंध निगरानी समिति की ताजा रिपोर्ट ने वैश्विक मंच पर पाकिस्तान के आतंकी दावों को बड़ा झटका दिया है। इस रिपोर्ट में आधिकारिक तौर पर यह दर्ज किया गया है कि पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले पर हुए भीषण आतंकवादी हमले में शामिल था। भारत के लिए इसे एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक जीत माना जा रहा है, क्योंकि पाकिस्तान वर्षों से अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने यह झूठ बोलता रहा है कि उसकी धरती पर सक्रिय आतंकी संगठन अब बेअसर या निष्क्रिय हो चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जैश-ए-मोहम्मद न केवल भारत में अपनी हिंसक गतिविधियों को जारी रखे हुए है, बल्कि वह अब अपनी संगठनात्मक क्षमताओं का विस्तार भी कर रहा है। सुरक्षा परिषद की रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया गया है कि इस आतंकी समूह ने जमात-उल-मुमिनात नामक एक समर्पित महिला विंग स्थापित करने की योजना बनाई है। रिपोर्ट के मुताबिक, जैश के सरगना मौलाना मसूद अज़हर अल्वी ने पिछले वर्ष 8 अक्टूबर को औपचारिक रूप से इस महिला शाखा की स्थापना की घोषणा की थी, जिसका मुख्य उद्देश्य भविष्य के आतंकवादी हमलों के लिए रसद और समर्थन जुटाना है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि जैश-ए-मोहम्मद 9 नवंबर को लाल किले पर हुए उस आत्मघाती हमले से जुड़ा था, जिसमें 15 निर्दोष लोगों की जान गई थी। इस रिपोर्ट पर चर्चा के दौरान पाकिस्तान ने अकेले ही कड़ा विरोध दर्ज कराया और बेशर्मी से यह दावा किया कि जैश अब एक निष्क्रिय संगठन है। हालांकि, अन्य सदस्य राष्ट्रों ने भारत द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों का समर्थन किया, जिसके चलते रिपोर्ट में जैश-ए-मोहम्मद और उसके अपराधों का उल्लेख बरकरार रखा गया। पाकिस्तान को एक और करारा झटका बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के मुद्दे पर लगा। पाकिस्तान और उसका सहयोगी चीन, बीएलए को अल-कायदा जैसे वैश्विक आतंकी समूहों से जोड़कर उसे यूएन की 1267 प्रतिबंध सूची में शामिल कराने की कोशिश कर रहे थे। उनका उद्देश्य बलूच विद्रोहियों को वैश्विक आतंकवादी घोषित करवाकर चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे पर हो रहे हमलों को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाना था। लेकिन संयुक्त राष्ट्र ने पाकिस्तान के इस नैरेटिव को सिरे से खारिज कर दिया। रिपोर्ट में साफ कहा गया कि सदस्य देशों के आकलन के अनुसार बीएलए का अल-कायदा के साथ कोई संबंध नहीं है। इतना ही नहीं, अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने बीएलए को आतंकी सूची में डालने के चीन-पाक प्रस्ताव पर तकनीकी होल्ड लगा दिया है। दिलचस्प बात यह है कि यह वही पैंतरा है जिसे चीन सालों तक जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों को बचाने के लिए भारत के खिलाफ इस्तेमाल करता रहा है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान और चीन का दोहरा मापदंड अब विश्व शक्तियों के सामने उजागर हो चुका है। वीरेंद्र/ईएमएस/12फरवरी2026