राष्ट्रीय
12-Feb-2026
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नई दिल्ली,(ईएमएस)। इंटरनेट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते उपयोग के बीच खुद से इलाज करने का चलन लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। राजधानी दिल्ली से ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला पिछले दिनों सामने आया था, जहां एआई की सलाह पर एचआईवी से बचाव की दवा लेने वाले 45 वर्षीय व्यक्ति को एक अत्यंत दुर्लभ और घातक बीमारी ‘स्टीवन्स जॉन्सन सिंड्रोम’ (एसजेएस) हो गई। जानकारी के अनुसार, उक्त व्यक्ति असुरक्षित यौन संबंध के बाद एचआईवी संक्रमण की आशंका से भयभीत था। इस डर के चलते उसने किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेने के बजाय इंटरनेट और एआई का सहारा लिया। एआई से मिली जानकारी के आधार पर उसने ‘पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस’ (पीईपी) दवाओं का 28 दिनों का कोर्स खुद ही खरीदकर शुरू कर दिया। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, पीईपी दवाएं केवल संभावित संक्रमण के 72 घंटों के भीतर और डॉक्टर की सख्त निगरानी में ही दी जाती हैं। डॉक्टरों ने बताया कि दवा शुरू करने के करीब सात दिन बाद ही मरीज के शरीर पर चकत्ते उभरने लगे थे, जो गंभीर एलर्जिक रिएक्शन का संकेत थे। इसके बावजूद उसने दवा लेना बंद नहीं किया। धीरे-धीरे यह समस्या आंखों, मुंह और शरीर के अन्य संवेदनशील हिस्सों तक फैल गई। हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां जांच के बाद डॉक्टरों ने स्टीवन्स जॉन्सन सिंड्रोम की पुष्टि की। यह एक गंभीर और दुर्लभ बीमारी है, जिसमें त्वचा और म्यूकोसा की परतें नष्ट होने लगती हैं और मरीज को आईसीयू में गहन उपचार की जरूरत पड़ती है। अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सकों ने इस बात पर भी चिंता जताई कि इतनी संवेदनशील और उच्च जोखिम वाली दवाएं मरीज को बिना पर्चे के कैसे उपलब्ध हो गईं। यह घटना एक कड़ा संदेश देती है कि स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में एआई और इंटरनेट केवल जानकारी का माध्यम हो सकते हैं, डॉक्टर का विकल्प नहीं। बिना विशेषज्ञ सलाह के दवाओं का सेवन गंभीर अंग क्षति, स्थायी विकलांगता या फिर मौत का कारण भी बन सकता है। विशेषज्ञों ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी बीमारी या आशंका की स्थिति में स्वयं इलाज करने के बजाय योग्य डॉक्टर से ही संपर्क करें। हिदायत/ईएमएस 12 फरवरी 2026