बिलासपुर (ईएमएस)। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर शहर के ब्रह्मकुमारी केंद्रों में विशेष आयोजन किए जा रहे हैं। गुरुवार से प्रारंभ हुए शिव मंगल मिलन मेला में 24 फीट ऊंचा विशाल शिवलिंग श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इसके साथ ही विभिन्न स्वरूपों के शिवलिंग और 12 ज्योतिर्लिंगों के प्रतिरूप के दर्शन कराए जा रहे हैं। मेले में अरुणाचलेश्वर तिरुवनमलाई, तमिलनाडु, पशुपतिनाथ काठमांडू, नेपाल, संगमेश्वर महादेव महाराष्ट्र, नागेश्वर महादेव लेपाक्षी, आंध्र प्रदेश और दुखहरण महादेव सहित विभिन्न प्रसिद्ध शिवलिंगों के स्वरूप प्रदर्शित किए गए हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी। चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी शाम 5.04 बजे से प्रारंभ होकर 16 फरवरी शाम 5.34 बजे तक रहेगी। द्रिक पंचांग के अनुसार 15 फरवरी को व्रत और पर्व मनाना श्रेष्ठ रहेगा। अरुणाचलेश्वर शिवलिंग (तमिलनाडु) अरुणाचलेश्वर मंदिर तमिलनाडु के तिरुवनमलाई में पवित्र अरुणाचल पहाड़ी की तलहटी में स्थित है। इसे अन्नामलैयार मंदिर भी कहा जाता है। यह शिव के अग्नि तत्व का प्रतीक माना जाता है और पंचभूत स्थलों में प्रमुख स्थान रखता है। पशुपतिनाथ शिवलिंग (नेपाल) नेपाल की राजधानी काठमांडू में बागमती नदी के तट पर स्थित पशुपतिनाथ मंदिर विश्वप्रसिद्ध शिवधाम है। यहां भगवान शिव ‘पशुपति’ अर्थात समस्त प्राणियों के स्वामी के रूप में पूजित हैं। संगमेश्वर महादेव (महाराष्ट्र) महाराष्ट्र के सासवड क्षेत्र में करवा और नीरा नदियों के संगम के समीप स्थित संगमेश्वर महादेव मंदिर प्राचीन आस्था का केंद्र है। संगम स्थल होने के कारण यहां विशेष आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। नागेश्वर महादेव (आंध्र प्रदेश) आंध्र प्रदेश के लेपाक्षी गांव में स्थित नागेश्वर महादेव मंदिर ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यहां शिव नाग रूप में पूजित हैं। दुखहरण महादेव दुखहरण महादेव के बारे में मान्यता है कि इनके दर्शन और पूजन से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं। श्रद्धालु विशेष रूप से मनोकामना पूर्ति के लिए यहां श्रद्धा अर्पित करते हैं। प्रमुख शिव मंदिरों में तेज़ी से चल रही तैयारियां महाशिवरात्रि को लेकर शहर के सभी प्रमुख शिव मंदिरों में तैयारियां जोरों पर हैं। चांटीडीह शिव मंदिर, मध्यनगरी चौक शिव मंदिर, सरकंडा नंदीश्वर मंदिर, तिफरा अयप्पा मंदिर, सदर बाजार स्थित घोंघा बाबा मंदिर, तिलक नगर श्रीराम मंदिर सहित अन्य मंदिरों में रंग-रोगन, साफ-सफाई और सजावट का कार्य तेजी से किया जा रहा है। मंदिरों को फूलों, लाइटों और धार्मिक झंडियों से सजाया जा रहा है। चांटीडीह शिव मंदिर में भरेगा ऐतिहासिक मेला चांटीडीह स्थित प्राचीन शिव मंदिर परिसर में महाशिवरात्रि के अवसर पर विशाल मेला भरेगा। इस मेले की खास बात यह है कि यहां भगवान शिव के दर्शन के साथ ही चारों धाम के दर्शन का पुण्य प्राप्त होता है, क्योंकि मंदिर परिसर में चारों धाम की प्रतिमाएं स्थापित हैं। मेले में मिट्टी और लकड़ी के खिलौने, धार्मिक सामग्री और छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी। इस मेले का आयोजन सोनी परिवार द्वारा किया जाता है। रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और भंडारे का आयोजन महाशिवरात्रि के दिन शहर के विभिन्न मंदिरों में तडक़े सुबह 4 बजे से रुद्राभिषेक का सिलसिला शुरू होगा, जो पूरे दिन चलता रहेगा। इसके साथ ही भजन-कीर्तन और शिव महिमा के गीतों की प्रस्तुति होगी। कई मंदिरों में रातभर जागरण का आयोजन किया जाएगा, जबकि दूसरे दिन तक भंडारे भी चलते रहेंगे। भोले शंकर की निकलेगी बारात महाशिवरात्रि के अवसर पर शहरभर में भगवान भोले शंकर की भव्य बारात निकाली जाएगी। विभिन्न स्थानों पर आकर्षक झांकियां सजाई जाएंगी, जिनमें शिव-पार्वती विवाह की झलक देखने को मिलेगी। श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों के साथ नाचते-गाते बारात में शामिल होंगे। जगह-जगह मेला और धार्मिक आयोजन होंगे।तिलक नगर स्थित श्रीराम मंदिर में पूरे दिन ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप किया जाएगा। सुबह 4 बजे भगवान का श्रृंगार, पूजा-अर्चना और आरती संपन्न होगी। भक्तों को 55 दर्जन केले और 25 किलो अंगूर का प्रसाद वितरित किया जाएगा। तिफरा और मगरपारा के प्राचीन शिव मंदिरों में विशेष आयोजन तिफरा अयप्पा मंदिर में सुबह महामृत्युंजय जाप, रुद्राभिषेक, भस्माभिषेक और पाल अभिषेक किया जाएगा। वहीं मगरपारा स्थित अष्टमुखी शिव पंचायती मंदिर, जो बिलासपुर का सबसे प्राचीन मंदिर माना जाता है, वहां सुबह 4 बजे से रुद्राभिषेक होगा। इस मंदिर में भगवान के शिवलिंग के आठ मुख हैं। यहां एक क्विंटल पेड़े का प्रसाद चढ़ाया जाएगा, साथ ही 100 किलो मेवा, मिष्ठान, फल और 100 किलो ठंडाई का भोग लगाया जाएगा। शाम 4 बजे भगवान की भव्य बारात निकाली जाएगी। मनोज राज 13 फरवरी 2026