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13-Feb-2026
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-वित्त मंत्री ने कहा- यह फैसला सभापति का अधिकार है, ऐसी मांग नहीं करनी चाहिए नई दिल्ली,(ईएमएस)। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शुक्रवार को कहा कि सदन में उनके दिए भाषण का एक हिस्सा राज्यसभा की वेबसाइट से हटा दिया गया है। इस पर उन्होंने आपत्ति जताई और कहा कि सभी बातें नियमों के दायरे में रहकर कर कही थीं। जवाब में सभापति ने कहा कि वे इस विषय को देखेंगे। खड़गे ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि हटाए गए अंशों को जोड़ा जाए। इस पर सदन में मौजूद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह फैसला सभापति का होता है और सभापति ने यदि अपने विवेक से नियमों के आधार पर फैसला लिया है तो ऐसे में नेता प्रतिपक्ष को ऐसी मांग नहीं करनी चाहिए। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मल्लिकार्जुन खड़गे का कहना था कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर सदन में दिए गए उनके भाषण का एक बड़ा हिस्सा बिना किसी उचित कारण के हटा दिया। उन्होंने जब राज्यसभा की वेबसाइट देखी तो उन्हें यहां अपने भाषण के अंश नहीं मिले। खड़गे ने सदन में आपत्ति जताते हुए कहा कि जिन अंशों को रिकॉर्ड से बाहर किया गया है, उनमें मुख्य रूप से वे हिस्से शामिल हैं जहां उन्होंने वर्तमान सरकार के कार्यकाल में संसदीय कामकाज की स्थिति पर तथ्य आधारित टिप्पणियां की थीं और कुछ नीतियों पर पीएम मोदी की आलोचना की थी। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष होने के नाते यह उनका दायित्व है कि वे उन नीतियों पर सवाल उठाएं जो उन्हें लगता है कि देश और जनमानस पर इसका प्रतिकूल असर पड़ सकता है। मेरा संसदीय जीवन पांच दशक से ज्यादा का है। विधायक और सांसद के रूप में लंबे अनुभव के दौरान मैंने सदन की गरिमा, नियमों और परंपराओं का हमेशा सम्मान किया है। मैं भली-भांति जानता हूं कि किन परिस्थितियों में किन शब्दों को रिकॉर्ड से हटाया जा सकता है। इसलिए पूरे विश्वास के साथ कह रहा हूं कि मेरे भाषण में कोई भी असंसदीय या मानहानिकारक शब्द नहीं था। मल्लिकार्जुन खड़गे ने सभापति से कहा कि मैं आपसे विनम्र आग्रह करता हूं कि हटाए गए अंशों पर पुनर्विचार किया जाए और उन्हें रिकॉर्ड में बहाल किया जाए। यदि मुझे सदन के अंदर न्याय नहीं मिलता, तो मैं जनता के बीच अपने भाषण का अनरिकॉर्डेड संस्करण साझा करने के लिए बाध्य होऊंगा। उस स्थिति में इसे नियमों के उल्लंघन के रूप में न देखा जाए, क्योंकि मेरा उद्देश्य केवल अपनी बात को पारदर्शिता के साथ देश के सामने रखना है। इससे असहमति जताते हुए सभापति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि यह सही नहीं है। मैं आपकी इस बात से सहमत नहीं हूं। यह बिल्कुल उचित नहीं है। यह लोकतांत्रिक भावना के अनुरूप नहीं है। आप कैसे पीठ को निर्देश दे सकते हैं? यह सरासर गलत है। इस पर खड़गे का कहना है कि वह केवल अपनी आपत्ति और अपनी पीड़ा रख रहे हैं। एक सदस्य के रूप में यह उनका अधिकार है कि यदि उनके भाषण का बड़ा हिस्सा हटाया गया है तो वह उसका कारण जानना चाहते हैं। वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा सदन की कार्यवाही नियमों से चलती है और उन नियमों के तहत अंतिम निर्णय पीठ का होता है। इसलिए मेरा मानना है कि पीठ के निर्णय का सम्मान किया जाना चाहिए और सदन की गरिमा बनाए रखी जानी चाहिए। सिराज/ईएमएस 13फरवरी26