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14-Feb-2026
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-केंद्रीय कानून मंत्री ने अपने लिखित जवाब में दी जानकारी नई दिल्ली,(ईएमएस)। केंद्र सरकार ने लोकसभा में जानकारी दी है कि पिछले दस वर्षों में सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों के मौजूदा न्यायाधीशों के खिलाफ कुल 8,630 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने शुक्रवार को एक लिखित उत्तर में यह जानकारी देते हुए बताया कि ये सभी शिकायतें भारत के मुख्य न्यायाधीश को अग्रेषित की गईं। मंत्री के अनुसार, कुल शिकायतों में से लगभग 50 प्रतिशत वर्ष 2022 से 2025 के बीच दर्ज की गई हैं, जिससे हाल के वर्षों में शिकायतों की संख्या में वृद्धि का संकेत मिलता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायाधीशों के खिलाफ प्राप्त शिकायतों की जांच के लिए सर्वोच्च न्यायालय में एक निर्धारित ‘इन-हाउस’ प्रक्रिया लागू है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा वर्ष 1997 में स्थापित इस इन-हाउस प्रक्रिया के तहत भारत के मुख्य न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के खिलाफ आने वाली शिकायतों पर विचार करते हैं। वहीं, संबंधित उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश अपने-अपने न्यायालय के न्यायाधीशों के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों की समीक्षा करते हैं। कानून मंत्री ने कहा कि सरकार को यदि किसी न्यायाधीश के खिलाफ शिकायत प्राप्त होती है तो उसे आगे की कार्रवाई के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश या संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को भेज दिया जाता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता संविधान में निहित है और शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया न्यायपालिका की आंतरिक व्यवस्था के माध्यम से ही संचालित होती है। इन-हाउस प्रक्रिया के अंतर्गत न्यायिक जीवन के मूल्यों और आचरण संबंधी मानकों को परिभाषित किया गया है, जिनका पालन सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों द्वारा किया जाना अपेक्षित है। इसके अतिरिक्त, सरकार की केंद्रीकृत सार्वजनिक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (सीपीजीआरएएमएस) के माध्यम से भी शिकायतें प्राप्त होती हैं। यह एक ऑनलाइन मंच है, जहां नागरिक किसी भी सार्वजनिक प्राधिकरण के विरुद्ध सेवा वितरण से संबंधित शिकायत दर्ज कर सकते हैं। यह पोर्टल केंद्र और राज्य सरकारों के सभी मंत्रालयों एवं विभागों से जुड़ा हुआ है। सरकार के इस खुलासे के बाद न्यायपालिका में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बहस तेज होने की संभावना है, हालांकि सरकार ने दोहराया है कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और स्वायत्तता पूरी तरह सुरक्षित है। हिदायत/ईएमएस 14फरवरी26