अंतर्राष्ट्रीय
15-Feb-2026
...


वाशिंगटन(ईएमएस)। मध्य पूर्व में तनाव के बीच अमेरिका से एक बेहद गंभीर खबर सामने आई है। अमेरिकी सैन्य गलियारों से छनकर आ रही जानकारियों के मुताबिक, अमेरिकी सेना ईरान के खिलाफ एक व्यापक और कई हफ्तों तक चलने वाली सैन्य कार्रवाई की योजना पर काम कर रही है। दो वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि यदि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हमला करने का अंतिम आदेश देते हैं, तो सेना इस बार केवल सांकेतिक प्रहार के बजाय एक लंबे समय तक चलने वाले निरंतर अभियान के लिए खुद को तैयार रख रही है। यह नई रणनीति पिछले अनुभवों के मुकाबले कहीं अधिक आक्रामक और व्यापक मानी जा रही है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष अमेरिका ने ईरान के कुछ परमाणु ठिकानों पर सीमित हवाई हमले किए थे, जो एक बार की गई त्वरित कार्रवाई थी। लेकिन मौजूदा सैन्य हलचल संकेत दे रही है कि इस बार अमेरिका की योजना ईरान के परमाणु ठिकानों के साथ-साथ उसके संपूर्ण सरकारी और सुरक्षा ढांचे को निशाना बनाने की है। पेंटागन ने अपनी रणनीति के तहत मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को अभूतपूर्व स्तर पर पहुंचा दिया है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने दुनिया के सबसे बड़े और आधुनिक विमानवाहक पोत, यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड को क्षेत्र में तैनात करने का आदेश दिया। यह वही जंगी जहाज है जिसने हाल ही में वेनेजुएला के पास अमेरिकी सैन्य दबाव बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के साथ हजारों अतिरिक्त सैनिक, उन्नत लड़ाकू विमान और मिसाइलों से लैस कई युद्धपोत भी तैनात किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी भारी सैन्य तैनाती का स्पष्ट अर्थ है कि अमेरिका एक बड़ी और लंबी जंग की तैयारी कर रहा है। ट्रंप ने भी अपने हालिया संबोधन में सैनिकों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि ईरान के साथ समझौता करना सरल नहीं है। उन्होंने कूटनीतिक भाषा के बजाय स्पष्ट शब्दों में कहा कि कभी-कभी डर ही हालात को नियंत्रित करने का सबसे प्रभावी तरीका होता है। व्हाइट हाउस की ओर से भी यह स्पष्ट कर दिया गया है कि ईरान के संदर्भ में सभी सैन्य विकल्प मेज पर हैं और अंतिम फैसला राष्ट्रपति की रणनीतिक सोच पर निर्भर करेगा। पिछले साल हुए मिडनाइट हैमर ऑपरेशन में अमेरिका ने स्टील्थ बॉम्बर्स का उपयोग कर सीमित क्षति पहुंचाई थी, जिसके जवाब में ईरान ने कतर स्थित अमेरिकी बेस पर मामूली हमला किया था। लेकिन इस बार का सैन्य खाका ईरान की जवाबी क्षमता को पूरी तरह पंगु बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। हालांकि, इस संभावित अभियान के साथ बड़े जोखिम भी जुड़े हैं। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने चेतावनी दी है कि यदि उसके क्षेत्र पर हमला हुआ, तो वह जॉर्डन, कुवैत, सऊदी अरब, कतर और तुर्की जैसे देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को अपनी लंबी दूरी की मिसाइलों से निशाना बनाएगी। इस टकराव से पूरे क्षेत्र में अस्थिरता फैलने का खतरा है। एक तरफ जहां सैन्य तैयारियां चरम पर हैं, वहीं ओमान में पर्दे के पीछे कूटनीतिक बातचीत भी जारी है। ईरान ने संकेत दिया है कि यदि उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएं, तो वह अपने परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा कर सकता है, हालांकि उसने अपने मिसाइल कार्यक्रम पर किसी भी समझौते से साफ इनकार कर दिया है। आने वाले कुछ हफ्ते वैश्विक राजनीति और मध्य पूर्व की शांति के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं। वीरेंद्र/ईएमएस 15 फरवरी 2026