ट्रेंडिंग
15-Feb-2026
...


ढाका (ईएमएस)। बांग्लादेश के आम चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की ऐतिहासिक जीत के बाद अब देश की बागडोर संभालने की औपचारिकताएं तेज हो गई हैं। आगामी 17 फरवरी को नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री और उनके पूरे मंत्रिमंडल का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होने जा रहा है। इस भव्य समारोह के लिए बांग्लादेश ने अपनी नेबरहुड फर्स्ट और वैश्विक कूटनीति को मजबूती देते हुए भारत और पाकिस्तान समेत कुल 13 देशों को निमंत्रण भेजा है। आमंत्रित देशों की सूची में चीन, सऊदी अरब, तुर्की, यूएई, कतर, मलेशिया, ब्रुनेई, श्रीलंका, नेपाल, मालदीव और भूटान जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्र शामिल हैं। इस बार का यह समारोह कई मायनों में अनूठा और ऐतिहासिक होने वाला है। परंपरा से हटकर, यह शपथ ग्रहण राष्ट्रपति भवन के बजाय राष्ट्रीय संसद परिसर के साउथ प्लाजा में आयोजित किया जा रहा है। यह बदलाव नए राजनीतिक युग की शुरुआत के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। संवैधानिक रूप से यह शपथ ग्रहण प्रक्रिया कुछ चुनौतियों और विशेष बदलावों के बीच संपन्न होगी। सामान्यतः सांसदों को पद की शपथ निवर्तमान अध्यक्ष (स्पीकर) द्वारा दिलाई जाती है, लेकिन वर्तमान में पूर्व अध्यक्ष शिरीन शरमिन चौधरी के इस्तीफे और उपाध्यक्ष के जेल में होने के कारण एक कानूनी संकट पैदा हो गया था। इस संवैधानिक बाधा को दूर करने के लिए राष्ट्रपति ने अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन को नवनिर्वाचित सांसदों को शपथ दिलाने के लिए अधिकृत किया है। बीएनपी के प्रमुख तारिक रहमान प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। हालांकि, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इस समारोह में शामिल होना लगभग नामुमकिन माना जा रहा है, क्योंकि 17 फरवरी को ही उनकी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ एक पूर्व निर्धारित उच्च स्तरीय बैठक है। ऐसी स्थिति में भारत की ओर से किसी वरिष्ठ प्रतिनिधि को ढाका भेजे जाने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मोदी उन पहले वैश्विक नेताओं में शामिल थे जिन्होंने तारिक रहमान को चुनाव में जीत के बाद बधाई दी थी। इस सकारात्मक रुख पर बीएनपी ने भी गर्मजोशी दिखाई है। पार्टी ने एक बयान जारी कर कहा कि बांग्लादेश लोकतांत्रिक मूल्यों, समावेशिता और प्रगतिशील विकास के लिए प्रतिबद्ध है और वह भारत के साथ आपसी सम्मान व साझा हितों के आधार पर संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तत्पर है। यह सत्ता परिवर्तन अगस्त 2024 में हुए छात्र आंदोलनों और शेख हसीना के 15 साल पुराने शासन के अंत के बाद हो रहा है। देश में व्यापक राजनीतिक उथल-पुथल और अल्पसंख्यकों पर हुए हमलों की घटनाओं के बाद यह 13वां संसदीय चुनाव काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तारिक रहमान के सामने अब न केवल कानून-व्यवस्था को बहाल करने की चुनौती है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को फिर से पटरी पर लाने की भी बड़ी जिम्मेदारी है। पूरे दक्षिण एशिया की नजरें अब 17 फरवरी को होने वाले इस सत्ता हस्तांतरण पर टिकी हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/15फरवरी2026