नई दिल्ली (ईएमएस)। जनवरी महीने में मारुति कंपनी की पांच ऐसी कारें रही हैं, जिनकी मासिक बिक्री 2000 यूनिट तक भी नहीं पहुंच सकी, जबकि माइलेज, फीचर्स और कीमत के मामले में ये कारें किसी से कम नहीं हैं। मारुति एस-प्रेसो की बात करें, तो इस माइलेज फ्रेंडली कार की जनवरी में सिर्फ 1,954 यूनिट्स ही बिकीं। 1.0-लीटर इंजन और 24–32 किमी/लीटर तक के माइलेज के बावजूद कम मांग इसके लिए चुनौती रही। इसी तरह नेक्सा की स्टाइलिश इग्निस भी केवल 1,902 यूनिट्स ही बेच पाई। 1.2-लीटर इंजन और 20 किमी/लीटर तक के माइलेज के बावजूद सीएनजी विकल्प न होना इसकी बिक्री को सीमित कर रहा है। मारुति सेलेरियो, जिसे माइलेज किंग कहा जाता है, जनवरी में महज 1,501 यूनिट्स पर सिमट गई। पेट्रोल में 26.68 किमी/लीटर और सीएनजी में 34.43 किमी/किग्रा का माइलेज देने वाली यह कार कम कीमत के बावजूद ग्राहकों को आकर्षित नहीं कर पाई। वहीं मारुति जिम्नी, जिसकी ऑफ-रोड क्षमता बेहद मजबूत है, जनवरी में सिर्फ 591 ग्राहकों तक पहुंच सकी। लगभग रुपए12.31 लाख की शुरुआती कीमत इसे बड़े पैमाने पर खरीदारों के बीच सीमित कर देती है। सबसे कम बिक्री मारुति की प्रीमियम एमपीवी इनविक्टो की रही, जिसकी जनवरी में केवल 197 यूनिट्स बिकीं। रुपए 25 लाख से अधिक की शुरुआती कीमत और प्रीमियम सेगमेंट की सीमित मांग इसकी बिक्री में प्रमुख बाधा बनी। इन आंकड़ों से साफ है कि कम बिक्री का अर्थ यह नहीं कि उत्पाद कमजोर है। माइलेज, फीचर्स और मारुति ब्रांड भरोसे के साथ ये कारें अब भी ग्राहकों के लिए मजबूत विकल्प हैं, लेकिन कीमत, सेगमेंट और बाजार की पसंद इनके खरीदारों का दायरा छोटा कर देती है। बता दें कि मारुति सुजुकी भारतीय कार बाजार में वर्षों से नंबर-1 ब्रांड बनी हुई है, लेकिन इसके मजबूत पोर्टफोलियो में कुछ ऐसे मॉडल भी शामिल हैं जिनकी बिक्री अपेक्षा से काफी कम रहती है। सुदामा/ईएमएस 16 फरवरी 2026