नई दिल्ली (ईएमएस)। चीन ने 1 मई से इस्वातिनी को छोड़कर 53 अफ्रीकी देशों से होने वाले करीब सभी आयात पर टैरिफ शून्य करने का ऐलान किया है। यह घोषणा राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने की। इससे पहले चीन 33 अफ्रीकी देशों को जीरो-टैरिफ सुविधा दे रहा था, जिसे अब राजनयिक संबंध रखने वाले करीब पूरे अफ्रीका तक विस्तार किया जा रहा है। चीन पहले से ही अफ्रीका का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। उसकी बेल्ट एंड रोड पहल के तहत महाद्वीप में बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश हो रहा है। टैरिफ हटाने का यह फैसला बीजिंग और अफ्रीकी देशों के बीच व्यापार और आर्थिक जुड़ाव को और गहरा करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत के लिए भी एक संकेत है। हाल के महीनों में भारत अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ तेज़ी से व्यापार समझौते आगे बढ़ा रहा है। इसके बाद चीन का टैरिफ में यह बड़ा बदलाव उसकी व्यापार नीति में लचीलापन दिखाता है। भारत का चीन के साथ बड़ा व्यापार घाटा है। चीनी बाजार में भारतीय उत्पादों पर आमतौर पर 5 प्रतिशत से 35 प्रतिशत तक कस्टम ड्यूटी लगती है। इसके बाद नई परिस्थितियों में भारत चीन के साथ टैरिफ रियायतों को लेकर बातचीत की कोशिश कर सकता है। अफ्रीका के लिए क्या फायदे? टैरिफ-मुक्त पहुंच से अफ्रीकी देशों के कृषि, खनिज और विनिर्माण उत्पादों को चीनी बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी। इससे उनके निर्यात, विदेशी मुद्रा आय और औद्योगिक विकास को गति मिल सकती है। शी जिनपिंग ने कहा कि यह व्यवस्था अफ्रीकी विकास के लिए नए अवसर खोलेगी। इथियोपिया में आयोजित अफ्रीकी संघ शिखर सम्मेलन के दौरान यह घोषणा उस समय की गई जब कई अफ्रीकी देश अपने व्यापारिक साझेदारों में विविधता लाने की कोशिश कर रहे हैं। कुल मिलाकर, चीन का यह कदम वैश्विक व्यापार समीकरणों में बदलाव का संकेत देता है जहां अफ्रीका, एशिया और उभरती अर्थव्यवस्थाएं नए आर्थिक गठबंधन की दिशा में आगे बढ़ती दिख रही हैं। आशीष/ईएमएस 17 फरवरी 2026