-मणिशंकर अय्यर के बयान से उपजे विवाद और बोरा के इस्तीफे से असंतोष उजागर नई दिल्ली,(ईएमएस)। चुनावी राज्यों में कांग्रेस के अंदर बढ़ती गुटबाजी और नेतृत्व को लेकर उठते सवालों ने पार्टी के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। केरल में वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर के बयान से उपजे विवाद से लेकर असम में भूपेन बोरा के इस्तीफे और फिर वापसी तक पार्टी के अंदर असंतोष खुलकर सामने आ गया है। केरल, असम, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में पार्टी के अंदर उठते विरोध के स्वर और सहयोगियों के साथ बढ़ते तनाव ने केंद्रीय नेतृत्व की चिंताएं बढ़ा दी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक केरल में वरिष्ठ कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर के एक बयान ने पार्टी को शर्मिंदा किया है। अय्यर ने भविष्यवाणी की है कि सीएम पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली एलडीएफ सरकार लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी करेगी। अय्यर ने न केवल विजयन की जीत का दावा किया, बल्कि उनके शासन को शानदार बताया। कांग्रेस द्वारा पल्ला झाड़ने के बावजूद अय्यर अपने बयान पर कायम हैं। उन्होंने कहा कि एक कांग्रेसी के रूप में मैं चाहता हूं कि यूडीएफ जीते, लेकिन एक गांधीवादी होने के नाते मैं सच बोलने के लिए बाध्य हूं। मुझे लगता है कि विजयन एक और कार्यकाल पाने जा रहे हैं। केरल में पारंपरिक रूप से हर पांच साल में सत्ता परिवर्तन होता रहा है, लेकिन 2021 में विजयन ने दोबारा जीतकर इस परंपरा का चक्र तोड़ दिया था। अय्यर की टिप्पणी ने कांग्रेस की सत्ता में वापसी की कोशिशों को झटका दिया है। असम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा के इस्तीफे ने पार्टी के अंदर मचे घमासान को उजागर कर दिया। बोरा ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को अपना इस्तीफा भेजा था। उनका आरोप था कि पार्टी नेतृत्व उन्हें नजरअंदाज कर रहा है और राज्य इकाई में उन्हें उचित सम्मान नहीं मिल रहा है। उन्होंने बेहाली प्रकरण और माजुली यात्रा से जुड़े निर्णयों पर असंतोष जताया था। हालांकि राहुल गांधी और केंद्रीय नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद बोरा ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है। तमिलनाडु में कांग्रेस की सबसे बड़ी टेंशन डीएमके के साथ गठबंधन है। सीएम एम के स्टालिन ने साफ कहा है कि चुनाव के बाद कोई सत्ता साझेदारी नहीं होगी। कांग्रेस के कुछ नेताओं द्वारा ज्यादा सीटों और सरकार में हिस्सेदारी की मांग पर स्टालिन ने इसे षड्यंत्र करार दिया है। डीएमके के वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेस की मांगों पर सख्त रुख अपनाया है और गठबंधन में दरार की आशंका बढ़ गई है। कांग्रेस नेता मणिक्कम टैगोर ने स्टालिन के प्रति वफादारी जताई है, लेकिन सीट-बंटवारे और स्थानीय चुनावों में आरक्षण जैसे मुद्दों पर खींचतान जारी है। पश्चिम बंगाल में इंडिया गठबंधन के दो प्रमुख घटक दल-कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस एक-दूसरे के खिलाफ खड़े नजर आ रहे हैं। सीएम ममता बनर्जी ने 2026 के विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने का ऐलान किया है। जवाबी कार्रवाई में कांग्रेस आलाकमान ने भी राज्य की सभी 294 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है। राष्ट्रीय स्तर पर साथ होने के बावजूद बंगाल में दोनों दलों के बीच चुनावी तालमेल पूरी तरह विफल रहा है। बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने इस स्थिति पर कहा कि जो लोग जीवन भर कांग्रेस में रहे, वे अब राहुल गांधी के खिलाफ बोल रहे हैं। उन्होंने अय्यर के उस बयान को साझा किया जिसमें उन्होंने कथित तौर पर खुद को राहुलवादी नहीं, बल्कि राजीववादी बताया था। बीजेपी का कहना है कि जब खुद के नेता ही नेतृत्व पर भरोसा नहीं कर रहे, तो जनता कैसे करेगी। सिराज/ईएमएस 18 फरवरी 2026