नई दिल्ली (ईएमएस)। यूनानी चिकित्सा प्रणाली के मुताबिक शरीर को जरूरत के अनुसार हिलना-डुलना चाहिए और समय पर पर्याप्त विश्राम भी मिलना चाहिए। यह संतुलन ही शरीर की ताकत, ऊर्जा, प्रतिरोधक क्षमता और मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत रखता है। यूनानी चिकित्सा प्रणाली में सेहत को बनाए रखने का मूल मंत्र है हरकत-ओ-सुकून बदनी, यानी शरीर की गतिविधि और आराम का सही संतुलन। यूनानी मत के अनुसार जब हम हल्की या मध्यम शारीरिक गतिविधि करते हैं, तो शरीर में जमा अवशेष और गंदगी बाहर निकलते हैं। इस प्रक्रिया को तनकिया कहा जाता है, जो शरीर की स्वाभाविक सफाई प्रणाली है और त्वचा से लेकर आंतरिक अंगों तक को स्वस्थ रखने में मदद करती है। वहीं आराम के दौरान शरीर की पाचन शक्ति, मरम्मत की प्रक्रिया और ऊर्जा संचित करने का काम अधिक सक्रिय हो जाता है, जिससे रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। यूनानी चिकित्सा मानती है कि हर व्यक्ति का मिजाज, उम्र, शारीरिक संरचना और स्वभाव अलग होता है, इसलिए व्यायाम और आराम का तरीका भी एक जैसा नहीं हो सकता। गर्म मिजाज वाले लोगों को गर्मियों में हल्की गतिविधियां करने और सर्दियों में थोड़ी अधिक सक्रिय रहने की सलाह दी जाती है। जबकि ठंडे मिजाज वाले लोग सर्दियों में हल्की गतिविधि करें और गर्मियों में नियमित रूप से हल्की शारीरिक गतिविधियों को अपनाएं। यही वजह है कि यूनानी चिकित्सा किसी एक विधि को सबके लिए उपयुक्त नहीं मानती, बल्कि व्यक्तिगत प्रकृति के अनुसार संतुलन बनाने पर जोर देती है। यूनानी सिद्धांतों में कुछ सरल लेकिन असरदार उपाय बताए गए हैं। सबसे पहले, रोजाना हल्की-फुल्की शारीरिक गतिविधि जरूरी है। सुबह या शाम की सैर, हल्का दौड़ना, योग या स्ट्रेचिंग न केवल शरीर को सक्रिय रखते हैं, बल्कि अंदरूनी सफाई और ताकत भी बढ़ाते हैं। दूसरा, लगातार बैठे रहने से बचना चाहिए। लंबे समय तक निष्क्रिय रहने से शरीर सुस्त हो जाता है, इसलिए समय-समय पर उठकर स्ट्रेच करना या थोड़ी हलचल करना लाभकारी होता है। तीसरा, व्यायाम हमेशा शरीर की क्षमता के अनुसार ही चुनें। अत्यधिक परिश्रम या जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज करने से ऊर्जा खत्म होती है और नुकसान पहुंचने का जोखिम बढ़ता है। चौथा, पर्याप्त आराम और नींद जरूर लें। दिन के दौरान भी छोटे ब्रेक लेकर शरीर को रिकवर होने का मौका दें। सुदामा/ईएमएस 18 फरवरी 2026