भोपाल,(ईएमएस)। मध्य प्रदेश विधानसभा में आज वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश होने से पहले ही सियासत गरमा गई है। सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही सदन के बाहर कांग्रेस ने सरकार की आर्थिक नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की तिजोरी खाली हो चुकी है और प्रदेश कर्ज के कुचक्र में फंस गया है। बजट सत्र के तीसरे दिन कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा परिसर में अनोखा प्रदर्शन किया। विधायक अपने हाथों में खाली गुल्लक लेकर पहुँचे, जो इस बात का प्रतीक था कि राज्य का खजाना खाली है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि आज मध्य प्रदेश में बजट की कुल राशि से कहीं अधिक तो सरकार पर कर्ज है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए खतरे की घंटी है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश सरकार बेतहाशा कर्ज ले रही है, जिसका खामियाजा आम जनता को ईएमआई भरकर चुकाना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश पर अब तक 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज हो चुका है। सरकार द्वारा बजट पर जनता से राय लेने के दावे पर सवाल उठाते हुए सिंघार ने पूछा कि आखिर सरकार स्पष्ट करे कि उसने किन लोगों से राय ली है? हाल ही में पेश हुए आर्थिक सर्वेक्षण को उमंग सिंघार ने आँकड़ों की बाजीगरी करार दिया। उन्होंने कहा कि सरकार गरीबों का मजाक उड़ा रही है। सिंघार ने यहाँ तक कह दिया कि, अगर सरकार के दावों के अनुसार गरीब इतना पैसा कमा रहा है, तो मैं अपने पद से इस्तीफा दे दूँगा। वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने केंद्र सरकार को भी इस वित्तीय संकट के लिए घेरा। पटवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर यह अवगत कराया गया है कि केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश के हक के 60,000 करोड़ रुपये अभी तक नहीं दिए हैं। इसी बकाया राशि के कारण राज्य पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। वीरेंद्र/ईएमएस/18फरवरी2026