वॉशिंगटन (ईएमएस)। अमेरिकी विदेश मंत्री ने म्यूनिख सिक्योरिटी प्रेसवार्ता में अपने भाषण में कई बातें कही हैं, जो दुनिया का ध्यान खींच रही हैं। विदेश मंत्री रुबियो ने वेस्ट से फिर से मुकाबला करने और ग्लोबल साउथ की इकॉनमी में मार्केट शेयर जीतने के लिए कहा है। जानकार ने इस बयान को ट्रंप प्रशासन की ईस्ट इंडिया की तरह से कॉलोनाइजेशन की कोशिश के तौर पर देखा है। जानकार ने कहा है कि यह बयान 18वीं और 19वीं सदी में यूरोपियन ताकतों के मार्केट और कच्चे माल की रेस में एशिया और अफ्रीका को बांटकर अपनी कॉलोनी बनाने की याद दिलाता है। मार्को रुबियो ने इस नई वेस्टर्न सदी बनाने की बात कही है। रुबियो ने ट्रंप की यूरोप के लिए रेड लाइन बताकर कहा, अमेरिका में हमें पश्चिम की मैनेज्ड गिरावट के विनम्र और व्यवस्थित रखवाले बनने में कोई दिलचस्पी नहीं है। हम सख्त बॉर्डर, इंडस्ट्री को फिर से शुरू करने और राष्ट्रीय संप्रभुता को फिर से लागू करने की मांग करते हैं। रूबियो के नजरिए ने कई लोगों को सतर्क किया है, क्योंकि ग्लोबल साउथ के बड़े हिस्से के कॉलोनी बनने के जख्म अभी ताजा हैं। इससे सवाल भी उठा है कि क्या ग्लोबल साउथ आर्थिक दबदबे के नए दौर का सामना कर रहा है। इस सीधे अमेरिका लीड करना चाहता है। ग्लोबल साउथ से मतलब विकासशील देशों के ग्रुप से है, जो मुख्य रूप से अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, एशिया और ओशिनिया में है। जियोपॉलिटिकल जानकार ने कहा कि पहचान और सभ्यता की बहाली के नजरिए से पश्चिम के भविष्य को देखकर रुबियो ने ट्रंप प्रशासन के आइडेंटिटेरियन विचारों को इंटेलेक्चुअल रूप देने की कोशिश की है। यह वाइट सुप्रीमेसिस्ट बहस में पाए जाने वाले विषयों की याद दिलाती है। जानकार ने लिखा, रुबियो ने जो विजन बताया है, वह सिर्फ पावर का बैलेंस नहीं चाहता। यह एक ग्लोबल हायरार्की को फिर से बनाना चाहता है, जो स्वाभाविक रूप से कुछ अलग है और यूरोपियन साम्राज्यवाद (इंपीरियलिज्म) और वेस्टर्न हेजेमनी (दबदबा) के पुराने दौर की याद दिलाता है।रुबियो के भाषण पर जियोपॉलिटिकल कमेंटेटर ने कहा है, यह सबसे ज्यादा इंपीरियलिस्ट भाषणों में से एक है, जो मैंने कभी किसी सीनियर अमेरिकी अधिकारी को देते देखा है। वह दुनिया भर में फैले बड़े साम्राज्यों को फिर से बनाना चाहते हैं। आशीष/ईएमएस 19 फरवरी 2026