अंतर्राष्ट्रीय
19-Feb-2026
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वॉशिंगटन(ईएमएस)। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। दोनों देशों के बीच कूटनीतिक वार्ताओं का दौर चलने के बावजूद, धरातल पर युद्ध की तैयारियां अभूतपूर्व स्तर पर देखी जा रही हैं। एक ओर जहां अमेरिका ने मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाते हुए घातक लड़ाकू विमानों और युद्धपोतों का जाल बिछा दिया है, वहीं दूसरी ओर ईरान ने संभावित अमेरिकी हमले से बचने के लिए अपने परमाणु ठिकानों की भारी किलेबंदी शुरू कर दी है। सैटेलाइट तस्वीरों के माध्यम से हुए नए खुलासे बेहद चौंकाने वाले हैं। इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी द्वारा जारी हाई-रिज़ॉल्यूशन तस्वीरों के विश्लेषण से पता चला है कि ईरान अपने सबसे संवेदनशील न्यूक्लियर ठिकानों को कंक्रीट और मिट्टी के नीचे दबाकर उन्हें अभेद्य बंकरों में तब्दील कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले दो-तीन हफ्तों से पारचिन मिलिट्री कॉम्प्लेक्स की तालेघन-2 फैसिलिटी को मिट्टी के अंदर छिपाने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। इसके अलावा, नतांज न्यूक्लियर प्लांट और एस्फ़हान न्यूक्लियर कॉम्प्लेक्स में भी सुरंगों के प्रवेश द्वारों को छिपाने और संरचनाओं को मजबूत करने की कोशिशें साफ देखी जा सकती हैं। एस्फ़हान वही महत्वपूर्ण एनरिचमेंट साइट है, जिस पर पिछले साल जून में बमबारी की गई थी। इस सैन्य किलेबंदी के जवाब में अमेरिका ने भी अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा और सैन्य विश्लेषकों ने रिकॉर्ड किया है कि बड़ी संख्या में अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों का बेड़ा इलाके की ओर बढ़ रहा है। सैन्य हलचलों के बीच कूटनीति की उम्मीदें अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। मंगलवार को जिनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत का दूसरा दौर संपन्न हुआ। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने जानकारी दी कि परमाणु मुद्दे और प्रतिबंधों में ढील को लेकर ईरान का दृष्टिकोण अमेरिका तक पहुंचा दिया गया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी संकेत दिए कि दोनों पक्ष कुछ बुनियादी मुद्दों पर सैद्धांतिक सहमति बनाने में सफल रहे हैं। दोनों देश जल्द ही तीसरे दौर की बैठक के लिए भी सहमत हो गए हैं। हालांकि, जिस तरह एक तरफ मेज पर बातचीत चल रही है और दूसरी तरफ सीमा पर हथियारों का जमावड़ा हो रहा है, उसे देखते हुए दुनिया भर के रणनीतिकार इसे तूफान से पहले की शांति के रूप में देख रहे हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/19फरवरी2026