नई दिल्ली (ईएमएस)। कुछ लोग हमेशा एसिडिटी, गैस, खट्टी डकार और सीने में जलन जैसी समस्याओं से परेशान रहते हैं। ज्यादातर लोग इसका कारण मसाले, तेल-घी या ओवरईटिंग को मानते है, लेकिन कई बार वजह लो स्टमक एसिड भी होता है। पेट में बनने वाला हाइड्रोक्लोरिक एसिड भोजन को तोड़ने, प्रोटीन को पचाने और जरूरी पोषक तत्वों को अवशोषित करने में अहम भूमिका निभाता है। इसकी कमी होने पर पाचन प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है और शरीर को उचित पोषण नहीं मिल पाता। विशेषज्ञ बताते हैं कि उम्र बढ़ने के साथ पेट का एसिड स्तर स्वाभाविक रूप से कम होने लगता है। लंबे समय तक एंटासिड दवाएं लेने, लगातार तनाव में रहने, जिंक या विटामिन बी 12 की कमी और अनियमित खानपान से भी स्टमक एसिड घट सकता है। जब पेट में एसिड कम बनता है, तो भोजन अधपचा रह जाता है और पेट में अधिक समय तक ठहरने लगता है। इससे गैस बनती है और पेट पर दबाव बढ़ जाता है। इसी दबाव के कारण भोजन और एसिड ऊपर गले की नली में लौट आता है, जिससे जलन, खट्टी डकार और रिफ्लक्स की समस्या होती है। अक्सर लोग इसे ज्यादा एसिड बनने का परिणाम समझते हैं, जबकि असल वजह एसिड की कमी भी हो सकती है। लो स्टमक एसिड के अलावा रोज़मर्रा की कई आदतें भी एसिडिटी बढ़ाती हैं अनियमित समय पर खाना, चाय-कॉफी का अधिक सेवन, कार्बोनेटेड ड्रिंक, देर रात तक जागना, तनाव, धूम्रपान, शराब, लंबे समय तक खाली पेट रहना और प्रोसेस्ड फूड का सेवन। कुछ दवाओं और हार्मोनल बदलावों से भी एसिडिटी की समस्या बढ़ सकती है। एसिडिटी से बचाव के लिए नियमित और संतुलित आहार सबसे जरूरी है। एक बार में बहुत ज्यादा खाने की बजाय दिनभर थोड़ा-थोड़ा खाएं और तला-भुना, अत्यधिक मसालेदार भोजन कम करें। खाने के तुरंत बाद लेटने से बचें और 20–30 मिनट हल्की वॉक करें। शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा बनाए रखें, यह पाचन को आसान बनाता है। तनाव कम करने के लिए योग, प्राणायाम और ध्यान बेहद लाभकारी हैं, क्योंकि तनाव बढ़ने पर कोर्टिसोल का स्तर बिगड़ता है और पाचन प्रभावित होता है। अगर एसिडिटी रोज होती है और लंबे समय से बनी हुई है, तो इसे सामान्य न समझें। हैल्थ विशेषज्ञों के अनुसार, सही निदान के बिना दवाओं का सेवन नुकसान पहुंचा सकता है। लगातार एसिडिटी लो स्टमक एसिड या जीवनशैली की गलत आदतों का संकेत हो सकती है। सुदामा/ईएमएस 20 फरवरी 2026