रियाद,(ईएमएस)। पाकिस्तान में खतरनाक भूचाल लाने वाली एक खबर ने शहबाज और मुनीर को सबसे तगड़ा झटका दे दिया है। शहबाज और मुनीर जो अमेरिका की गोद में बैठने की कोशिश करते थे। भारत को आंख दिखाने की साजिश रच रहे थे। लेकिन अब कैसे भारत के साथ डील होते ही अमेरिका ने पाकिस्तान को उसकी हैसियत दिखा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान और चीन द्वारा मिलकर बनाए जेएफ7 थंडर फाइटर जेट को सऊदी अरब को बेचने की कोशिश जमकर चल रही थी। पाकिस्तान को उम्मीद थी कि अज़रबैजान के बाद में अब सऊदी अरब बड़ा आर्डर देगा। चर्चा यह भी थी कि सऊदी इन जेट्स को खरीद कर सूडान जैसे देशों को सपोर्ट कर सकता है। लेकिन अमेरिका के दबाव के बाद सऊदी अरब ने इस डील से पीछे हटने का सबसे बड़ा संकेत दे दिया। खाड़ी क्षेत्र दशकों से अमेरिकी हथियारों का बड़ा बाजार रहा है। सऊदी एयरफोर्स पहले से ही एफ1-15 ईगल जैसे अमेरिकी प्लेटफार्म पर पूरी तरह से निर्भर है। इसलिए अमेरिका कभी नहीं चाहता कि चीन समर्थित फाइटर जेट खाड़ी में रणनीतिक घुसपैठ करें। साथ ही तुर्की के काम प्रोग्राम को लेकर भी वाशिंगटन पूरी तरह से सतर्क है। अमेरिका की प्राथमिकता है कि भविष्य में सऊदी अरब उसका पांचवी पीढ़ी का स्टेल्थ जेट एफ35 लाइटनिंग 2 खरीदे। हालांकि इस पर क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण भी पूरी तरीके से जुड़े हुए हैं। सऊदी अरब अपनी डिफेंस सोर्सिंग को डायवर्सिफाई करना चाहता है। विज 2030 के तहत वहां रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता भी बढ़ाना चाहता है। लेकिन उसकी सुरक्षा संरचना अब भी अमेरिकी सपोर्ट पर टिकी हुई है। इस संतुलन की वजह से रियाद को फिलहाल सावधानी बरतनी पड़ी। पाकिस्तान के लिए यह डील को हटना। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही कर्ज और आईएमएफ कार्यक्रमों पर निर्भर है। रक्षा निर्यात उसके लिए विदेशी मुद्रा कमाने का एक अहम जरिया हो सकता है। जेएफ-7 के अंतरराष्ट्रीय बिक्री से पाकिस्तान को रणनीतिक और आर्थिक दोनों लाभ मिलते हैं। डील रुकने से यह संभावित कमाई फिलहाल अटक गई है। कुछ और अहम तथ्य भी है। जैसे कि सितंबर में सऊदी और पाकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग समझौता हुआ था। जिसमें सुरक्षा सहयोग को औपचारिक रूप दिया गया। दोनों देश एक रणनीतिक आर्थिक समझौते पर भी बातचीत कर रहे हैं। दूसरी ओर, यूएई ने पाकिस्तान को कर्ज चुकाने में अतिरिक्त राहत देने से इंकार किया है। आशीष/ईएमएस 20 फरवरी 2026