अंतर्राष्ट्रीय
20-Feb-2026
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अमेरिका को पाकिस्तान की अंदरूनी चुनौतियों के बारे में बताया वॉशिंगटन (ईएमएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप गाजा बोर्ड ऑफ पीस को लेकर पहली बैठक करने वाले हैं। ये बैठक अमेरिकी समय के मुताबिक गुरुवार को होने वाली है। इसमें भाग लेने के लिए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ वॉशिंगटन पहुंचे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक के शुरू होने से पहले पाकिस्तान ने अमेरिका के सामने कुछ शर्तें रखी हैं, जिसमें अमेरिका से कुछ खास अधिकार और गारंटी की मांग की गई है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शरीफ भारी भरकम डेलिगेशन के साथ वॉशिंगटन पहुंचे हैं, जिसमें उनके विदेश मंत्री इशाक डार, वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब, सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार और स्पेशल असिस्टेंट तारिक फातेमी साथ हैं। सूत्रों के हवाले से बताया गया कि पाकिस्तान के आर्मी प्रमुख असीम मुनीर ने सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ सैनिकों की तैनाती पर चर्चा की है। मुनीर ने पिछले दो दिनों में म्यूनिख में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रियाद में सऊदी अरब के रक्षा मंत्री और अबू धाबी में यूएई के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के साथ भी बैठकें की हैं। पाकिस्तान ने तुर्की की सेना के साथ गाजा में अपने सैनिकों को तैनात करने की मांग की है। पाकिस्तान ने इजरायली डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) के बराबर एक संयुक्त कमांड और कंट्रोल हेडक्वार्टर की मांग की है। मुनीर ने सैनिकों को भेजने के बदले अमेरिका से भारी भरकम डॉलर की मांग की है। पाकिस्तान यूएस, यूएई, कतर और गाजा पीस बोर्ड और आईएसएफ के दूसरे स्टेकहोल्डर्स से और सिक्योरिटी, गारंटी भी चाहता है। सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया हैं कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शरीफ और फील्ड मार्शल मुनीर, गाजा में सेना भेजने में पाकिस्तान की अंदरूनी चुनौतियों के बारे में अमेरिकी अधिकारियों को जानकारी देने वाले है। इसके अलावा पाकिस्तान, सेना भेजने के लिए और समय की मांग कर सकता है। सूत्रों ने बताया है कि शहबाज और असीम मुनीर के पास अमेरिकी दौरे के समय गेमचेंजर एजेंडा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन दोनों को डर है कि अगर इस्लामाबाद सेना भेजने के लिए राजी होता है, तब घरेलू अशांति, राजनीतिक विरोध और इस्लामी संगठनों की लामबंदी और हमास के प्रति सहानुभूति रखने वाले देशों की प्रतिक्रियाओं का खतरा है। इसके पहले रिपोर्ट आई थी कि पाकिस्तान ने गाजा में शांति सेना को भेजने के बदले अपने लिए लीडरशिप की मांग की थी। यानि गाजा में सभी देशों की सेनाओं का नेतृत्व पाकिस्तान करता। इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया। इजरायल ने भी पाकिस्तान की किसी भी भूमिका का सख्त विरोध किया है। वहीं, शहबाज शरीफ के दौरे को लेकर पाकिस्तान विदेश मंत्रालय की तरफ से जो प्रेस रिलीज जारी किया है, उसमें कई सारी गलतियां थीं। जिसकी वजह से उसका मजाक उड़ रहा है। यह ऐसी पहली घटना नहीं है। पिछले साल, इंटरनेशनल पॉलिटिक्स में एक टेंशन वाले समय भी शहबाज शरीफ एक और कथित टाइपो की वजह से सोशल मीडिया का फोकस बन गए थे। आशीष/ईएमएस 20 फरवरी 2026