20-Feb-2026
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- कोलार में भूजल प्रदूषण की हुई पुष्टि - सुरक्षित पेयजल, पारदर्शी जांच और सीवेज नेटवर्क विस्तार की मांग तेज अभिनय कुमार जैन भोपाल (ईएमएस)। मध्य प्रदेश में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में कथित रूप से दूषित जल से लगभग 35 लोगों की मौत की खबर ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। वहीं राजधानी भोपाल के कोलार क्षेत्र में भूजल में ई-कोलाई बैक्टीरिया मिलने से स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और गहरा गई हैं। दोनों घटनाओं ने राज्य में जल प्रबंधन और निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। कोलार के गेहूंखेड़ा और साईं नाथ नगर में जांच के दौरान भूजल में ई-कोलाई संक्रमण की पुष्टि होने पर नगर निगम ने दो नलकूप बंद करा दिए। इसके बावजूद बड़ी आबादी अब भी ट्यूबवेल और टैंकर के पानी पर निर्भर है। कोलार जोन 18 और 19 के छह वार्डों में 88 हजार से अधिक संपत्तिकर दाता हैं, जबकि केवल लगभग 35 हजार घरों तक ही नियमित नगर निगम जल आपूर्ति पहुंचती है। शेष परिवार निजी बोरिंग या टैंकर से पानी लेने को मजबूर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में सीवेज नेटवर्क का अभाव और घरों के नीचे बने सेप्टिक टैंकों से अपशिष्ट का रिसाव भूजल प्रदूषण की प्रमुख वजह है। दूषित पानी के सेवन से डायरिया, उल्टी, बुखार और अन्य जठरांत्र संबंधी संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। अभी कुछ समय पूर्व इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से हुई मौतो ने प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि प्रारंभिक रिपोर्टें सही हैं, तो यह केवल स्थानीय लापरवाही नहीं बल्कि जल गुणवत्ता निगरानी व्यवस्था की व्यापक कमी को दर्शाता है। इतिहास भी चेतावनी देता है 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के दीर्घकालिक प्रभावों में भूजल प्रदूषण की आशंकाएँ शामिल रही हैं। चार दशक बाद भी यदि सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित नहीं हो पा रहा, तो इसे गंभीर नीतिगत चुनौती माना जा रहा है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नगर निगम की जल आपूर्ति सीमित समय के लिए होती है और कई बार पानी दूषित या बदबूदार आता है। मजबूरी में लोग ट्यूबवेल का पानी पीने को विवश हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि संदिग्ध भूजल का उपयोग केवल धुलाई या बागवानी तक सीमित रखा जाए तथा पीने के लिए उबला या फिल्टर किया हुआ पानी ही प्रयोग किया जाए। नगर निगम प्रशासन का कहना है कि शिकायत मिलने पर पानी की जांच कराई जाती है और आवश्यकतानुसार स्रोत बंद किए जाते हैं। नागरिकों को भी समय-समय पर पानी की जांच कराने की सलाह दी गई है।