स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने योगी सरकार पर तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा, कि मुख्यमंत्री योगी ने 20 दिन में निर्णय नहीं लिया तो वह लखनऊ की ओर कूच करेंगे। ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से “हिंदू होने का प्रमाण” मांगा था। शंकराचार्य ने गो-रक्षा के मुद्दे पर कानून बनाने के लिए कहा था। उनकी इस मांग पर राज्य सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि 20 दिन बीत जाने के बावजूद योगी ने ना तो हिंदू होने का प्रमाण दिया है ना ही गौ रक्षा के मामले में कोई ठोस निर्णय ही सामने आया है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी को चेतावनी दी है, यदि तय समय सीमा में कदम नहीं उठाया गया तो वह 11 मार्च तक लखनऊ की ओर प्रस्थान करेंगे। प्रयागराज में हुई घटना में बटुकों के साथ कथित बदसलूकी, मारपीट और ज्यादती को लेकर उत्तर प्रदेश के दो उपमुख्यमंत्री योगी के विरोध में खड़े हो गए हैं। उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने अपने घर पर बटुकों को बुलाकर उनका सम्मान किया है जिसके कारण उत्तर प्रदेश में भाजपा और संघ की स्थिति चिंताजनक हो गई है। भारतीय राजनीति में 80 और 20 का समीकरण बनाकर हिंदुओं को एकजुट करने का जो प्रयास किया गया था, वह उत्तर प्रदेश से ही टूटता हुआ नजर आ रहा है। यूजीसी ने जो नए नियम लागू किए थे, उसके बाद हिंदुओं में सामान्य जातियों, पिछड़ा वर्ग, एसटी, एससी को लेकर हिंदू बिखरने की स्थिति में आ गए हैं। रही-सही कसर शंकराचार्य और योगी महाराज के बीच जो विवाद चल रहा है, उसस हिंदुओं का हर वर्ग नाराज नजर आ रहा है। शंकराचार्य के साथ योगी के विवाद तथा यूजीसी की अधिसूचना के बाद हिंदुओं में बिखराव का एक नया दौर शुरू हो गया है। भारतीय राजनीति एक बार फिर से अलग करवट लेने जा रही है। ब्राह्मण और दलित समुदाय के उपमुख्यमंत्री खुलकर शंकराचार्य के साथ आ गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को नई राजनीतिक चुनौती मिलना शुरू हो गई है। ऐसी स्थिति में संघ और भाजपा दोनों की चिंताएं बढ़ गई हैं। इस मामले को सुलझाने के लिए संघ प्रमुख मोहन भागवत को उत्तर प्रदेश की यात्रा करनी पड़ी। उसके बाद भी विवाद सुलझने के स्थान पर उलझता चला जा रहा है। राज्य के दोनों उप मुख्यमंत्रियों के साथ विधायकों का एक बड़ा समूह योगी के विरोध में खड़ा हो गया है। जिससे स्पष्ट है, मामला गंभीर है। ऐसी स्थिति में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को शंकराचार्य को लेकर अपना रुख स्पष्ट करना होगा। उत्तर प्रदेश में दलित, अल्पसंख्यक, पिछडा वर्ग और ब्राह्मण भाजपा से नाराज हैं। अब असली और नकली हिंदुओं की बात होने लगी है। योगी आदित्यनाथ की सरकार ने अविमुक्तेश्वरानंद से शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा था। गौ हत्या और को मांस के निर्यात को लेकर अब शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से योगी और हिंदू होने का प्रमाण मांग कर भाजपा के लिए एक परेशानी खड़ी कर दी है। शंकराचार्य ने कहा मुख्यमंत्री योगी ने सनातन और हिंदुओं के विरुद्ध जो “कचरा फैलाया है”। उसे भाजपा को स्वयं साफ करना होगा। उन्होंने कहा कि जब तक पार्टी स्पष्ट रूप से यह नहीं दिखाती वह हिंदुओं और सनातन मूल्यों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। तब तक संत समाज को भाजपा के हिंदुत्व पर अब विश्वास नहीं होगा। शंकराचार्य के इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इसका असर राष्ट्रीय स्तर पर होना तय है। राजनीतिक विश्लेषक यह मानकर चल रहे हैं, भाजपा ने हिंदू वर्सेस अल्पसंख्यक का जो धार्मिक ध्रुवीकरण तैयार कर हिंदुओं को एकजुट किया था अब उसके बिखरने का समय आ गया है। हिंदू धर्म के शीर्ष पर बैठे शंकराचार्य जब सार्वजनिक नाराजगी व्यक्त करने लगे और योगी जैसे मठाधीश को जब हिंदू मानने से इनकार कर दें ऐसी स्थिति में राहुल गांधी ने संसद के अंदर जो असली और नकली हिंदू का मामला उठाया था अब इस मामले को शंकराचार्य हवा दे रहे हैं। जिसके कारण यह माना जा रहा है, देश की राजनीति एक बदलाव के मुकाम पर आकर खड़ी हो गई है। संघ और भाजपा ने समय रहते इस बिखराव को नहीं रोका तो आगे चलकर भाजपा और संघ को बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए उत्तर प्रदेश की सरकार पर अस्तित्व का संकट देखने को मिलने लगा है। यह बात केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगी। इसका असर राष्ट्रीय स्तर पर पडना तय है। एसजे/ 20 फरवरी /2026