फ्लोरिडा (ईएमएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नाम पर फ्लोरिडा के पालम बीच इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदलने का प्रस्ताव अमेरिकी राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। रिपब्लिकन बहुल फ्लोरिडा स्टेट लेजिस्लेचर एयरपोर्ट का नाम “डोनल्ड जे ट्रंप इंटरनेशनल एयरपोर्ट” रखने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में मंगलवार को यह प्रस्ताव 81-30 मतों से पारित हो गया। रिपब्लिकन पार्टी के नेताओं का तर्क है कि ट्रंप फ्लोरिडा से राष्ट्रपति बनने वाले पहले व्यक्ति हैं, इसलिए उन्हें यह सम्मान मिलना चाहिए। हालांकि ट्रंप ने अपने जीवन का अधिकांश समय न्यूयॉर्क में बिताया और अपने पहले कार्यकाल के अंतिम चरण में फ्लोरिडा को आधिकारिक निवास बनाया था। वहीं डेमोक्रेटिक पार्टी के कई सांसदों ने इसका विरोध किया। उनका कहना है कि किसी मौजूदा राष्ट्रपति या पद पर आसीन नेता के नाम पर सार्वजनिक संपत्ति का नामकरण असामान्य परंपरा है और इससे राजनीतिक संदेश जाता है। ट्रेडमार्क आवेदन से बढ़ा विवाद विवाद का एक और बड़ा कारण द ट्रंप ऑर्गनाइजेशन द्वारा दायर ट्रेडमार्क आवेदन है। कंपनी ने “डोनल्ड जे ट्रंप इंटरनेशनल एयरपोर्ट” और उससे मिलते-जुलते नामों के लिए ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन की अर्जी दी है। कंपनी के प्रवक्ता के मुताबिक, ट्रंप या उनका परिवार एयरपोर्ट के नाम बदलने से कोई रॉयल्टी या लाइसेंस शुल्क नहीं लेगा। हालांकि स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रेडमार्क दस्तावेज संकेत देते हैं कि इस नाम का उपयोग घड़ियों, आभूषण, कपड़े, रेस्तरां सेवाओं और स्मारिका वस्तुओं के लाइसेंसिंग के लिए किया जा सकता है। आवेदन में एयरपोर्ट के बैगेज चेक-इन क्षेत्र, निर्माण कार्य और यहां तक कि सुरक्षा जांच के दौरान इस्तेमाल होने वाले उत्पादों पर भी अधिकार का दावा शामिल बताया जा रहा है। विपक्ष का संशोधन खारिज स्टेट सीनेट में विपक्षी सांसदों ने एक संशोधन पेश कर यह सुनिश्चित करने की मांग की थी कि ट्रंप या उनके परिवार को नए नाम से कोई निजी आर्थिक लाभ न हो। हालांकि रिपब्लिकन सदस्यों ने समिति स्तर पर इस संशोधन को खारिज कर दिया। अब यह विधेयक सीनेट में मतदान के लिए जा सकता है। माना जा रहा है कि फ्लोरिडा के गवर्नर इसे मंजूरी दे सकते हैं। यह प्रस्ताव केवल नाम परिवर्तन तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े संभावित व्यावसायिक और राजनीतिक प्रभावों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है। हिदायत/ईएमएस 21 फरवरी 2026