अंतर्राष्ट्रीय
21-Feb-2026
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बर्न (ईएमएस)। चीन और जापान जैसे देशों में तो सुपरफास्ट ट्रेनें सैकड़ों किलोमीटर का सफर कुछ ही घंटों में पूरा कर लेती हैं। लेकिन इसके विपरीत दुनिया में एक ऐसी एक्सप्रेस ट्रेन भी है, जिसकी रफ्तार इतनी धीमी है कि महज 290 किलोमीटर का सफर तय करने में उसे पूरे 8 घंटे लगते हैं। इस वजह से उसे दुनिया की सबसे धीमी एक्सप्रेस ट्रेन के खिताब से जाना जाता है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, यह ट्रेन है स्विट्ज़रलैंड की प्रसिद्ध ग्लेशियर एक्सप्रेस। यह ट्रेन आल्प्स पर्वत श्रृंखला के खूबसूरत लेकिन चुनौतीपूर्ण इलाकों से गुजरती है। ग्लेशियर एक्सप्रेस स्विट्ज़रलैंड के दो लोकप्रिय कस्बों झेरमाट और सेंट.मॉरिटज को जोड़ती है। इसकी औसत गति केवल 36 किलोमीटर प्रति घंटा है, जो सुनने में किसी एक्सप्रेस ट्रेन जैसी बिल्कुल नहीं लगती। मगर इसके पीछे कई बड़ी वजहें हैं। दरअसल, ग्लेशियर एक्सप्रेस का उद्देश्य सिर्फ गंतव्य तक पहुंचाना नहीं, बल्कि यात्रियों को आल्प्स पर्वत की अद्भुत सुंदरता से रूबरू कराना है। इसकी खिड़कियाँ बेहद बड़ी बनाई गई हैं ताकि यात्रियों को पैनारोमिक व्यू मिल सके और वे प्राकृतिक नज़ारों का आनंद उठा सकें। लोग इस ट्रेन में सफर इसलिए करते हैं ताकि वे स्विट्ज़रलैंड की शानदार घाटियों, पहाड़ों और ग्लेशियरों को करीब से देख सकें। ट्रेन के धीमी गति से चलने के तकनीकी कारण भी हैं। इसका पूरा रूट दुर्गम पहाड़ी इलाकों से गुजरता है जहाँ तेज गति में ट्रेन चलाना जोखिम भरा हो सकता है। कहीं ऊँची चढ़ाई है, कहीं तेज ढलान, तो कहीं खतरनाक मोड़। सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्पीड को नियंत्रित रखा जाता है। इसके अलावा यह ट्रेन नैरो गेज ट्रैक पर चलती है, जिस पर अत्यधिक रफ्तार उपयुक्त नहीं मानी जाती। यह 8 घंटे का सफर बेहद रोमांचक माना जाता है क्योंकि रास्ते में ट्रेन 291 पुलों और 91 टनलों से गुजरती है। यह यात्रा समुद्र तल से करीब 6670 फीट की ऊँचाई पर होती है, जो इसे और भी अनूठा बनाती है। ग्लेशियर एक्सप्रेस में फर्स्ट क्लास, सेकंड क्लास और लग्ज़री एक्सिलेंस क्लास जैसी सुविधाएँ मिलती हैं, जहाँ यात्रियों को 5-स्टार होटल जैसी सर्विस दी जाती है। धीमी होने के बावजूद यह ट्रेन अपने अनुभव, प्राकृतिक सौंदर्य और रोमांचक रूट के कारण दुनिया की सबसे पसंदीदा ट्रेनों में शामिल है। मालूम हो कि भारत में हाई स्पीड ट्रेनों का दौर तेजी से बढ़ रहा है। वंदे भारत, राजधानी और तेजस जैसी ट्रेनें जहां तेज रफ्तार के लिए जानी जाती हैं, वहीं बुलेट ट्रेन परियोजना भी अपने विस्तार की ओर है। सुदामा/ईएमएस 21 फरवरी 2026