मां बेचती थीं फूल, पिता करते थे मजदूरी... नई दिल्ली (ईएमएस)। आईसीसी टी20 विश्व कप 2026 में अब सुपर-8 चरण की शुरुआत हो चुका है। टूर्नामेंट शुरू होने से पहले श्रीलंका को बेहद कमजोर माना जा रहा था, लेकिन कई खिलाड़ियों ने ग्रुप स्टेज में दमदार खेल दिखाते हुए टीम को आगे बढ़ाया। इनमें सबसे बड़ा योगदान रहा ओपनर पाथुम निसंका का, जिन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मुश्किल परिस्थितियों में शानदार शतक लगाकर श्रीलंका की राह आसान कर दी। निसंका टी20 विश्व कप में श्रीलंका के लिए शतक लगाने वाले महेला जयवर्धने के बाद सिर्फ दूसरे खिलाड़ी बने हैं। केवल टी20 ही नहीं, बल्कि वनडे में भी वे धाकड़ प्रदर्शन कर चुके हैं। निसंका श्रीलंका के लिए वनडे में दोहरा शतक लगाने का कारनामा कर चुके हैं और इसी वजह से आज उन्हें टीम का ‘रन मशीन’ कहा जाता है। लेकिन 27 साल के इस खिलाड़ी की सफलता तक का सफर बेहद संघर्षों से भरा रहा है। बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले निसंका के पिता सुनील निसंका गाले में ग्राउंड बॉय की नौकरी करते थे, जिनका काम सिर्फ मैदान की देखभाल करना था। कमाई इतनी कम थी कि परिवार का खर्च चलाना भी मुश्किल हो जाता था। फिर भी उन्होंने कभी बेटे के क्रिकेट प्रेम को टूटने नहीं दिया। बचपन में पाथुम को अच्छी किट तक उपलब्ध नहीं हो पाती थी, लेकिन पिता ने उनकी लगन को हमेशा आगे बढ़ाया। निसंका की मां ने भी परिवार की जिम्मेदारी उठाने में बड़ी भूमिका निभाई। घर की तंगी को दूर करने के लिए उन्होंने गाले के पास कलूतारा मंदिर के बाहर फूल और अगरबत्ती बेचने का काम शुरू किया। धूप-बारिश की परवाह किए बिना वे घंटों बैठती थीं ताकि बेटे की डाइट और ट्रेनिंग के लिए जरूरी पैसे जुटा सकें। माता-पिता के इसी संघर्ष और निसंका की मेहनत ने उन्हें आज श्रीलंका क्रिकेट का बड़ा सितारा बना दिया है। करियर की बात करें तो निसंका ने 2021 में श्रीलंका के लिए इंटरनेशनल डेब्यू किया था। अब तक वह 18 टेस्ट, 77 वनडे और 87 टी20 मैच खेल चुके हैं। टेस्ट में उन्होंने 45 की औसत से 1305 रन बनाए हैं, जिसमें 4 शतक और 7 अर्धशतक शामिल हैं। उनका सर्वोच्च टेस्ट स्कोर 187 रन है। वनडे में निसंका का औसत 40.55 का है और उनके नाम 7 शतक व 18 अर्धशतक दर्ज हैं। वनडे में उनका सर्वोच्च स्कोर 210 रन है, जो उन्होंने अफगानिस्तान के खिलाफ बनाया था। टी20 में भी उन्होंने 2574 रन बनाते हुए 2 शतक और 18 फिफ्टी अपने नाम की हैं। पाथुम निसंका की कहानी बताती है कि प्रतिभा और मेहनत को अगर परिवार का साथ मिल जाए, तो किसी भी मंजिल को हासिल करना नामुमकिन नहीं होता। डेविड/ईएमएस 21 फरवरी 2026