फरार चल रहे चार आरोपियों के खिलाफ लुक आउट नोटिस जयपुर (ईएमएस)। राजस्थान में जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले से जुड़े मामले में विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद शनिवार को गिरफ्तार सभी नौ आरोपियों को कोर्ट में पेश कर दिया। इसके पहले शुक्रवार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, राजस्थान (एसीबी) ने आरोपियों से करीब चार घंटे तक आमने-सामने बैठाकर गहन पूछताछ की। इस दौरान कुछ आरोपियों से अलग-अलग भी सवाल-जवाब किए गए, ताकि तथ्यों की पुष्टि की जा सके और बयानों में विरोधाभास की जांच हो सके। जांच एजेंसी एसीबी ने 17 फरवरी को जलप्रदाय विभाग के नौ अधिकारियों को गिरफ्तार किया था और 18 फरवरी को उन्हें कोर्ट में पेश कर पांच दिन का रिमांड मांगा था। हालांकि, अदालत ने तीन दिन का ही रिमांड मंजूर किया। रिमांड अवधि पूरी होने पर शनिवार को सभी आरोपियों को दुबारा कोर्ट में प्रस्तुत किया गया। कोर्ट में पेश किए गए आरोपियों में चीफ इंजीनियर (जयपुर शहर) केडी गुप्ता, तत्कालीन मुख्य अभियंता (पीएचईडी परियोजना) जयपुर दिनेश गोयल, रिटायर्ड तकनीकी चीफ इंजीनियर डीके गौड, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता निरिल कुमार, तत्कालीन वित्तीय सलाहकार सुशील शर्मा, अतिरिक्त मुख्य अभियंता शुभांशु दीक्षित, रिटायर्ड अतिरिक्त मुख्य अभियंता अरुण श्रीवास्तव, रिटायर्ड अधीक्षण अभियंता महेन्द्र प्रकाश सोनी और तत्कालीन अधिशाषी अभियंता विशाल सक्सेना शामिल हैं। वहीं, फरार चल रहे चार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एसीबी की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। इसमें रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल, अधीक्षण अभियंता जितेन्द्र शर्मा और तत्कालीन एससी मुकेश गोयल प्रमुख हैं। विदेश भागने की आशंका के चलते इन सभी के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया है, लेकिन अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। एसीबी की जांच में फर्जी बिल, वित्तीय गड़बड़ियां और टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं के साक्ष्य मिलने की बात सामने आई है। जयपुर सहित विभिन्न राज्यों में कुल 15 स्थानों पर छापेमारी की गई थी। अधिकारियों के अनुसार, मामले की गहन जांच जारी है और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। आशीष दुबे / 21 फरवरी 2026