- पुलिस किसी को वीडियो कॉल कर घर पर कैद नहीं करती - डिजिटल अरेस्ट से बचने एक बार फिर जारी हुई एडवायजरी भोपाल(ईएमएस)। देश सहित मध्य प्रदेश और राजधानी भोपाल में भी साइबर ठगोरो द्वारा डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर लगातार आपराधिक वारदातो को अंजाम देकर ठगी की जा रही हैं। इसको लेकर साइबर क्राइम पुलिस आमजन को जागरुक करने के लिये समय-समय पर एडवाइजरी जारी कर लोगों से सतर्क रहने की अपील करती है। विभाग द्वारा एक बार फिर एडवायजरी जारी करते हुए आमजन का बताया है कि कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई प्रावधान नहीं है, और न ही पुलिस किसी को वीडियो कॉल कर घर में कैद करती है। यह साइबर जालसाजो के अपराध करने का एक नया तरीका है, और जरा सी सावधानी बरतने से आप इस धोखाधड़ी से बच सकते है। - बढ़ता जा रहे है डिजिटल अरेस्ट के मामले एडवायजरी में बताया गया है कि ठगों ने आमजन को शिकार बनाने का नया तरीका निकाला है। इसमें यह साइबर अपराधी खुद को सीबीआई, इंटरपोल का या किसी भी अन्य जॉच एंजेसी का पुलिस अधिकारी, क्राइम ब्रांच पुलिस अधिकारी बताकर लोगो को अश्लील सामग्री देखने का झूठा आरोप लगाकर डराकर अवैध वसूली कर रहे हैं। - ऐसे फंसाते है जाल में जालसाज आपको फोन या व्हाट्सएप कॉल करके हैं कि आपकी इंटरनेट हिस्ट्री में आपतिजनक कंटेंट पाया गया है। या फिर कुरियर पैकेट में मिले संदिग्ध सिम, आधार कार्ड का मिस यूज, मनी लॉन्ड्रिंग, टेररिस्ट कन्वर्जन में आपके मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किये जाने जैसे हथकंडे अपनाकर आपको डरा-धमकाकर हाउस अरेस्ट (डिजिटल अरेस्ट) कर लेते हैं। - जेल भेजने, गिरफ्तारी करने का दिखाते है डर आरोपी फर्जी अधिकारी बनकर कॉल करते हुए आप पर जेल जाने, कोर्ट कचहरी या आपकी सोशल मीडिया पर बदनामी करने की धमकी देते हुए दबाव बनाते बनाकर डराते हैं। - पूरा सेटअप रहता है असली पुलिस और कोर्ट जैसा वीडियो कॉल के दौरान शातिर ठगो का सेटअप पुलिस स्टेशन और अदालत जैसा रहता है। वेबकैम, स्काइप मोबाइल से वीडियो पर आमने-सामने होकर रकम ठगने तक वह आपको डरा कर रखते हैं। इतना ही नहीं नकली पुलिस अफसरों से भी अलग-अलग नंबरों पर बात कराई जाती है। जबकि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। ठगोरे वीडियो कॉल के दौरान पुलिस की फर्जी वर्दी और फर्जी आईडी के साथ नजर आते होते हैं, इतना ही नहीं वह जाल में फसें लोगो को फर्जी कोर्ट समन या अरेस्ट वारंट भी दिखाते हैं। - बचाने का झांसा देकर करते है लेनदेन कोई भी जांच एजेंसी फोन कॉल या व्हाट्सएप पर सेटलमेंट के लिए पैसे की मांग नहीं करती एडवायजरी में कहा गया है की आरोपी बाद में केस रफा-दफा करने के लिए आपसे यूपीआई या बैंक ट्रांसफर के जरिए पैसों की मांग करते हैं। जबकि विभाग द्वारा स्पष्ट निर्देश दिये गये है कि भारतीय पुलिस या कोई भी जांच एजेंसी (सीबीआई, इंटरपोल ) कभी भी फोन कॉल या व्हाट्सएप पर सेटलमेंट के लिए पैसे की मांग नहीं करती है। कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई प्रावधान नहीं है। पुलिस किसी को वीडियो कॉल पर घर में कैद नहीं करती। - इस तरह बच सकते है जालसाजो से कोई भी सरकारी विभाग आपसे फोन पर आपकी बैंक डिटेल्स, ओटीपी या निजी फोटो नहीं मांगता। यदि आपको ऐसा कॉल आए तो घबराएं नहीं। अपराधी आपकी घबराहट का फायदा उठाते हैं। ऐसे समय में शांत रहे और तुरंत कॉल काट दें। इसके बाद उस नंबर को तुरंत ब्लॉक करें और अपनी प्राइवेसी सेटिंग्स अपडेट करें। एक बार पैसा देने पर अपराधी बार-बार और बड़े रकम की मांग करेंगे, इसलिये जांच एजेंसियों के नाम से आ रहे इस प्रकार के फोन आने से डरकर जमानत के नाम पर अपना ओटीपी न दें या किसी भी खाते में रुपये जमा न कराएं। उनके कहने पर कोई भी ऐप डाउनलोड ना करें। - यदि आप शिकार हो जाएं यह करें यदि आप किसी भूल या गलती के कारण जालसाजो के जाल में फंस जायें तो घबरायें नहीं फौरन ही इसकी शिकायत नजदीकी पुलिस स्टेशन में दर्ज करायें। साथ ही पुलिस ने आमजन से अपील की है की अपनी निजे जीवन से जुडे कई मामलो में साइबर सुरक्षा को प्राथमिकता दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत रिपोर्ट करें। आपकी सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। किसी भी तरह की सायबर काईम संबंधित घटना होने पर इसकी सूचना भोपाल सायबर क्राइम के हेल्पलाइन नम्बर 9479990636 अथवा राष्ट्रीय हेल्पलाईन नंबर 1930 पर दें। जुनेद / 21 फरवरी